उत्तरायणी मेले का रंगीन आगाज़, बरेली में बिखरी देवभूमि की सांस्कृतिक छटा

बरेली। बरेली क्लब मैदान पर मंगलवार से तीन दिवसीय उत्तरायणी मेला पूरे उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ शुरू हो गया। इस आयोजन के माध्यम से देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध परंपराएं, लोकसंस्कृति और लोककलाएं शहरवासियों के सामने जीवंत रूप में प्रस्तुत की जा रही हैं। पहले ही दिन मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और उत्तराखंड की संस्कृति से रूबरू हुए।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मेले का शुभारंभ करना था, लेकिन अपरिहार्य कारणों से उनका कार्यक्रम निरस्त हो गया। इसके बाद जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी वीरेंद्र नंद गिरी ने विधिवत रूप से मेले का उद्घाटन किया।
शहर में निकली रंगयात्रा, सड़कों पर उतरी संस्कृति
मेले के उद्घाटन से पूर्व शहर में भव्य रंगयात्रा निकाली गई। पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों, आकर्षक झांकियों और लोकनृत्यों से सजी यह यात्रा शहर की सड़कों पर उत्तराखंड की संस्कृति के रंग बिखेरती नजर आई। ढोल-दमाऊ और अन्य पर्वतीय वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच कलाकारों की प्रस्तुतियों ने शहरवासियों का मन मोह लिया।
लोकनृत्य और वाद्य यंत्र बने आकर्षण
रंगयात्रा में बैंड के साथ गूंजती पर्वतीय वाद्य यंत्रों की धुन और नृत्य करती महिला कलाकारों की टोली ने समां बांध दिया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। खास तौर पर उत्तराखंड का प्रसिद्ध छोलिया नृत्य दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा।
तीन दिन तक चलेगा सांस्कृतिक उत्सव
उत्तरायणी मेला तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य, गीत-संगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियां होंगी। आयोजकों के अनुसार मेले का उद्देश्य देवभूमि की लोकसंस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करना है।






