यूपी में बिजली की मांग बढ़ने के आसार, गर्मी में पीक डिमांड नया रिकॉर्ड बना सकती है
उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली की खपत में तेजी से इजाफा होने की संभावना है। मार्च में ही 22,000 मेगावाट पीक डिमांड दर्ज होने का अनुमान है, जबकि गर्मियों में यह 33,000 मेगावाट से अधिक पहुंच सकती है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गर्मी की शुरुआत के साथ ही बिजली की मांग तेजी से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च महीने में ही प्रदेश की पीक बिजली मांग 22,000 मेगावाट तक पहुंचने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो यह मौजूदा रुझानों के आधार पर इस वर्ष की शुरुआत में ही एक नया रिकॉर्ड हो सकता है।
ऊर्जा विभाग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में गर्मी बढ़ने के साथ एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों के इस्तेमाल में बढ़ोतरी होती है, जिससे बिजली की खपत तेजी से बढ़ जाती है।
देश में भी लगातार बढ़ रही बिजली की मांग
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में देशभर में बिजली की अधिकतम मांग लगातार बढ़ी है।
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वित्तीय वर्ष 2022-23 में देश में अधिकतम बिजली मांग 2,15,888 मेगावाट दर्ज की गई थी। उस समय 2,07,231 मेगावाट की आपूर्ति हो सकी और करीब 8,657 मेगावाट यानी लगभग 4 प्रतिशत की कमी रही।
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वित्तीय वर्ष 2023-24 में यह मांग बढ़कर 2,43,271 मेगावाट हो गई। इसमें 2,39,931 मेगावाट की आपूर्ति हुई और लगभग 3,340 मेगावाट (करीब 1.4 प्रतिशत) की कमी दर्ज की गई।
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वित्तीय वर्ष 2024-25 में देश में बिजली की अधिकतम मांग 2,49,856 मेगावाट तक पहुंच गई और लगभग पूरी मांग की आपूर्ति की गई। उस समय मात्र दो मेगावाट की नगण्य कमी दर्ज हुई।
चालू वित्तीय वर्ष में भी मांग ऊंचे स्तर पर
वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनवरी 2026 तक देश में अधिकतम बिजली मांग 2,45,444 मेगावाट दर्ज की जा चुकी है। इसमें से 2,45,416 मेगावाट की आपूर्ति की गई, जबकि केवल 28 मेगावाट की कमी रही।
यह आंकड़े बताते हैं कि देश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था में भी सुधार हुआ है।
यूपी में भी तेजी से बढ़ रही पीक डिमांड
उत्तर प्रदेश में भी बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। मार्च 2025 में प्रदेश की अधिकतम पीक डिमांड 26 मार्च को 21,869 मेगावाट दर्ज की गई थी।
वहीं मार्च 2026 में अब तक की अधिकतम मांग 9 मार्च को 21,307 मेगावाट रही है। मौजूदा रुझानों को देखते हुए अगले एक-दो दिनों में यह आंकड़ा 22,000 मेगावाट तक पहुंच सकता है।
गर्मियों में 33,000 मेगावाट से अधिक हो सकती है मांग
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भीषण गर्मी के दौरान बिजली की मांग और तेजी से बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) की केंद्रीय राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में देश में बिजली की अधिकतम मांग लगातार बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि हालांकि आपूर्ति व्यवस्था में सुधार हुआ है, लेकिन उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में अभी भी रोस्टर व्यवस्था लागू है। ऐसे में गर्मी बढ़ने के साथ बिजली प्रबंधन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।
उन्होंने बताया कि 11 जून 2025 को प्रदेश में अधिकतम पीक डिमांड 31,486 मेगावाट तक पहुंच चुकी थी। इस साल यह आंकड़ा 33,000 मेगावाट से भी अधिक होने की संभावना जताई जा रही है।
बिजली कंपनियों को तैयारी के निर्देश
उपभोक्ता परिषद का कहना है कि बढ़ती मांग को देखते हुए बिजली कंपनियों और पावर कॉरपोरेशन को अभी से उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते तैयारियां पूरी कर ली जाएं तो गर्मियों में उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है और बड़े स्तर पर बिजली संकट की स्थिति से बचा जा सकता है।






