बरेली: कानूनगो पर अवैध कॉलोनी बसाने का आरोप, पत्नी-ससुर के जरिए प्लॉट बिक्री का मामला
बरेली के बहेड़ी में तैनात कानूनगो सुरेश यादव पर अवैध कॉलोनी बसाने और पत्नी व ससुर के जरिए प्लॉट बेचने के आरोप लगे हैं। नगर निगम और प्राधिकरण की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं।

बरेली जिले के बहेड़ी क्षेत्र में तैनात एक कानूनगो पर अवैध कॉलोनी बसाने और सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त में भूमिका निभाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि पहले लेखपाल और बाद में कानूनगो पद पर रहे सुरेश यादव ने सरकारी सेवा में रहते हुए ही कॉलोनाइजर की तरह काम किया और शहर के मिनी बाईपास से सटे नर्सरी रोड इलाके में ‘बालाजी पुरम’ नाम से कॉलोनी विकसित कर दी।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस कॉलोनी में प्लॉटों की बिक्री में स्वयं सुरेश यादव के अलावा उनकी पत्नी और ससुर की भी अहम भूमिका बताई जा रही है। आरोप है कि कई प्लॉट इन्हीं के माध्यम से खरीदारों को बेचे गए, जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
प्राधिकरण से स्वीकृति नहीं, नदी से जुड़ी जमीन पर कब्जे की आशंका
बताया जा रहा है कि जिस कॉलोनी को विकसित किया गया है, उसे संबंधित विकास प्राधिकरण से औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। स्थानीय लोगों का दावा है कि कॉलोनी के कुछ हिस्सों में ऐसी जमीन भी शामिल हो सकती है, जो नदी क्षेत्र या उससे जुड़ी भूमि श्रेणी में आती है।
यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो मामला केवल अवैध कॉलोनी निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राजस्व नियमों के उल्लंघन, भूमि संरक्षण कानूनों की अनदेखी और संभावित पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का भी मामला बन सकता है। इसी कारण पूरे प्रकरण को लेकर स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
सरकारी सेवा में रहते निजी कारोबार पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि राजस्व विभाग में तैनात कोई कर्मचारी किस प्रकार कॉलोनाइजर के रूप में काम कर सकता है। सरकारी सेवा नियमों के तहत किसी भी कर्मचारी को निजी व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति नहीं होती।
इसके बावजूद आरोप है कि वर्षों तक इस तरह की गतिविधियां चलती रहीं, लेकिन किसी भी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। इससे यह भी चर्चा शुरू हो गई है कि क्या प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही रही या फिर मामले को नजरअंदाज किया गया।
नगर निगम की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में
स्थानीय स्तर पर यह भी बताया जा रहा है कि अवैध कॉलोनी को लेकर नगर निगम में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का प्रस्ताव भी लंबित बताया जा रहा है। हालांकि अब तक इस दिशा में कोई निर्णायक कदम सामने नहीं आया है।
यदि जांच में अवैध निर्माण और भूमि कब्जे के आरोप सही पाए जाते हैं तो नगर निगम और अन्य संबंधित एजेंसियों द्वारा मुकदमा दर्ज करने तथा कॉलोनी पर कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।
प्राधिकरण की चुप्पी पर भी उठ रहे सवाल
दूसरी ओर विकास प्राधिकरण की चुप्पी भी चर्चा का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब अन्य अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई होती है तो फिर मिनी बाईपास के पास नर्सरी रोड स्थित इस कॉलोनी पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
सूत्रों का यह भी दावा है कि संबंधित अधिकारी की प्राधिकरण में मजबूत पकड़ होने के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई। हालांकि इस संबंध में किसी अधिकारी की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
लेखपाल रहते शुरू हुआ जमीन का खेल?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुरेश यादव ने क्षेत्रीय लेखपाल रहते हुए ही जमीन के इस पूरे नेटवर्क की शुरुआत कर दी थी। दावा किया जा रहा है कि उस दौरान नदी से जुड़ी सरकारी जमीन के प्लॉट तैयार कराए गए और कई प्लॉट पत्नी तथा ससुर के माध्यम से बेचे गए।
इन आरोपों के सामने आने के बाद अब क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इस पूरे मामले में किसका संरक्षण मिला हुआ है। यदि निष्पक्ष और गहन जांच होती है तो अवैध कॉलोनी निर्माण, जमीन कब्जे और संपत्ति के स्रोत से जुड़े कई बड़े तथ्य सामने आ सकते हैं।
फिलहाल स्थानीय स्तर पर लोग प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।






