भरतौल गांव बना राष्ट्रीय मॉडल: प्रधान प्रवेश को 17 सम्मान, बरेली का बढ़ाया गौरव
बरेली के भरतौल गांव ने विकास के नए मानक स्थापित किए हैं। ग्राम प्रधान प्रवेश के नेतृत्व में गांव को 17 सम्मान मिले, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिया गया बाल हितैषी पंचायत पुरस्कार भी शामिल है।

बरेली:
बिथरी चैनपुर ब्लॉक का भरतौल गांव आज ग्रामीण विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। कभी सामान्य गांव के रूप में पहचाना जाने वाला यह क्षेत्र अब अपने योजनाबद्ध और प्रभावी विकास कार्यों के चलते राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल कर चुका है। ग्राम प्रधान प्रवेश के नेतृत्व में गांव ने ऐसे मानक स्थापित किए हैं, जो इसे एक मॉडल ग्राम पंचायत के रूप में स्थापित करते हैं।
ग्राम प्रधान प्रवेश की दूरदर्शी सोच और सक्रिय कार्यशैली का ही परिणाम है कि भरतौल को प्रदेश से लेकर राजधानी लखनऊ और देश की राजधानी नई दिल्ली तक सराहना मिली है। स्वास्थ्य, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में किए गए प्रयासों ने इस गांव को अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बना दिया है।
राष्ट्रपति के हाथों मिला सम्मान, देशभर में दूसरा स्थान
11 दिसंबर 2024 को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में ग्राम प्रधान प्रवेश को ‘बाल हितैषी पंचायत पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। इस प्रतिष्ठित सम्मान में उन्होंने देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त किया। यह सम्मान उन्हें भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों मिला।
इसके अलावा लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में अमर उजाला, गांव जंक्शन और मुथूट फाइनेंस द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि न केवल भरतौल गांव, बल्कि पूरे बरेली जिले के लिए गौरव का विषय बन चुकी है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, मातृ-शिशु देखभाल पर विशेष फोकस
भरतौल गांव में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। नियमित स्वास्थ्य शिविरों, टीकाकरण अभियानों और मातृ-शिशु देखभाल कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए बच्चों को समय पर पोषाहार उपलब्ध कराया जा रहा है, वहीं गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और टीकाकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन पहलों ने गांव के स्वास्थ्य मानकों में उल्लेखनीय सुधार किया है।
स्वच्छता मॉडल बना भरतौल, डोर-टू-डोर कलेक्शन व्यवस्था
स्वच्छता के क्षेत्र में भी भरतौल गांव ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। यहां हर घर से कूड़ा संग्रहण की डोर-टू-डोर व्यवस्था लागू की गई है। सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग एकत्र कर रिसोर्स रिकवरी सेंटर तक पहुंचाया जाता है।
इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए प्रत्येक परिवार से प्रतीकात्मक रूप से एक रुपये का योगदान लिया जाता है, जिससे यह पहल जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बन गई है।
हर घर तक बुनियादी सुविधाएं, आरओ पानी और ‘हर घर जल’ योजना
गांव में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करते हुए हर घर तक शुद्ध आरओ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। ‘हर घर जल’ योजना के तहत नल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि शौचालय निर्माण के जरिए स्वच्छता को बढ़ावा दिया गया है।
इसके अलावा बच्चों के लिए खेल मैदान, स्कूलों में हैंडवॉश यूनिट और वॉश बेसिन जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं, जिससे जीवन स्तर में व्यापक सुधार हुआ है।
देश का पहला ‘अन्नपूर्णा राशन स्टोर’, ग्रामीणों को बड़ी राहत
भरतौल गांव की एक विशेष उपलब्धि ‘अन्नपूर्णा राशन स्टोर’ है, जिसे देश का पहला ऐसा मॉडल माना जा रहा है। इस केंद्र पर सस्ता गल्ला, दैनिक उपयोग की वस्तुएं, बिजली बिल जमा करने की सुविधा और आय-जाति प्रमाणपत्र जैसी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं।
इस पहल ने ग्रामीणों को शहर जाने की आवश्यकता को काफी हद तक कम कर दिया है और समय व संसाधनों की बचत सुनिश्चित की है।
17 सम्मानों से सम्मानित प्रधान प्रवेश, विकास का जारी है सिलसिला
ग्राम प्रधान प्रवेश को अब तक कुल 17 पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। हाल ही में उन्हें ‘श्रेष्ठ प्रधान सम्मान’ से भी नवाजा गया। इस उपलब्धि पर उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरे गांव के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है और उनका लक्ष्य आगे भी समग्र विकास को गति देना है।
मॉडल ग्राम पंचायत के रूप में उभरा भरतौल
आज भरतौल गांव केवल एक पंचायत नहीं, बल्कि एक सफल विकास मॉडल बन चुका है। यहां योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और जनसहभागिता मिलकर वास्तविक परिवर्तन ला रही है।
भरतौल यह साबित करता है कि मजबूत नेतृत्व, पारदर्शिता और सामूहिक भागीदारी के जरिए किसी भी गांव को नई पहचान दी जा सकती है।





