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Bareilly: सपा जिलाध्यक्ष पर सस्पेंस, नए चेहरे को मिल सकता मौका

बरेली में सपा जिलाध्यक्ष के नाम को लेकर सस्पेंस बरकरार है। अखिलेश यादव के संकेत के बाद पुराने दावेदारों को झटका लगा है, जबकि नए चेहरों के लिए उम्मीदें बढ़ गई हैं।

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Bareilly Political News: बरेली में समाजवादी पार्टी के नए जिलाध्यक्ष को लेकर चल रहा सस्पेंस और गहरा गया है। लखनऊ में हुई अहम बैठक में जिले से पहुंचे नेताओं को जहां नाम के ऐलान की उम्मीद थी, वहीं पार्टी नेतृत्व के संकेतों ने पूरी तस्वीर ही बदल दी।

बैठक में शामिल नेताओं के अनुसार, कई दावेदार खुद को मजबूत उम्मीदवार मानकर पहुंचे थे, लेकिन सपा प्रमुख Akhilesh Yadav के स्पष्ट संदेश के बाद उनकी उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। बैठक के दौरान एक विधानसभा प्रभारी के सवाल पर अखिलेश यादव ने साफ कहा कि जिलाध्यक्ष का नाम जल्द तय किया जाएगा, लेकिन वह चेहरा नहीं होगा जिसकी आमतौर पर चर्चा हो रही है।

इस बयान के बाद बरेली सपा में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जहां पुराने और चर्चित दावेदारों के चेहरे फीके पड़ गए हैं, वहीं नए और अपेक्षाकृत कम चर्चित चेहरों में उम्मीद की किरण जगी है।

पूर्व जिलाध्यक्ष शिवचरन कश्यप के पद से हटने के बाद दावेदारों की लंबी सूची सामने आई थी, जिसमें बड़ी संख्या में यादव वर्ग के नेता शामिल थे। हालांकि, लखनऊ में हुई मंथन बैठक के बाद यह संकेत मिले हैं कि पार्टी हाईकमान गुटबाजी से दूर, निष्पक्ष और मजबूत संगठनकर्ता को जिम्मेदारी देने के मूड में है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि बरेली में आंतरिक खींचतान और गुटबाजी को लेकर हाईकमान सख्त है। ऐसे में जिलाध्यक्ष का पद किसी ऐसे चेहरे को दिया जा सकता है, जो किसी गुट विशेष से जुड़ा न हो और संगठन को एकजुट करने में सक्षम हो।

राजनीतिक विश्लेषण के मुताबिक, सपा अब भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखते हुए कदम बढ़ा रही है। 2022 विधानसभा चुनाव में मिली सीमित सफलता के बाद पार्टी अब 2027 और आगे की तैयारियों में जुटी है। इसी के तहत ‘PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक)’ फॉर्मूले पर नए चेहरों को आगे लाने की रणनीति बनाई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, जिलाध्यक्ष पद के लिए लखनऊ स्तर पर जोरदार लॉबिंग भी जारी है। विभिन्न गुट अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में सक्रिय हैं, लेकिन अखिलेश यादव की ‘टॉप सीक्रेट’ रणनीति ने सभी समीकरणों को उलझा दिया है।

इस बीच, बैठक में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। विधानसभा प्रभारियों से बूथ स्तर तक की रिपोर्ट मांगी गई और 14 अप्रैल को B. R. Ambedkar जयंती पर व्यापक कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए।


वापसी चाहने वालों को नहीं मिलेगा मौका

पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि सपा फिलहाल उन नेताओं को दोबारा शामिल करने के पक्ष में नहीं है, जो सत्ता परिवर्तन के बाद पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। ऐसे कई नेता फिर से सपा में वापसी की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हाईकमान ने इस पर सख्त रुख अपनाया है।

बताया जा रहा है कि कुछ नेता अपने समर्थकों के जरिए वापसी का माहौल बनाने में जुटे हैं, लेकिन पार्टी नेतृत्व की ओर से साफ संकेत है कि फिलहाल ऐसे चेहरों के लिए संगठन में ‘नो एंट्री’ की नीति लागू रहेगी।

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