काली बेईं में पानी छोड़ने के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन

कपूरथला: शाहवाला अंदरीसा गांव में बुधवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब ग्रामीणों ने शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से ट्रीट किए गए पानी की आउटपुट पाइपलाइन बिछाने का कार्य रुकवा दिया। विरोध के बीच प्रशासन को मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और एहतियातन पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया।
पाइपलाइन कार्य रुकवाया, धरने पर बैठे ग्रामीण
ग्रामीणों ने मौके पर धरना देकर कार्य का विरोध किया। उनका आरोप है कि शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का पानी पवित्र मानी जाने वाली काली बेईं में छोड़े जाने की योजना बनाई जा रही है। उनका कहना है कि इससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होगा, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक आस्था भी आहत होगी।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रारंभिक बातचीत के दौरान पाइपलाइन के लिए वैकल्पिक मार्ग का आश्वासन दिया गया था। लेकिन बाद में योजना बदलकर पाइपलाइन गांव की जमीन से होकर बिछाने का निर्णय ले लिया गया।
जमीन से जबरन पाइपलाइन बिछाने का आरोप
धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि बिना उनकी सहमति के उनकी निजी और कृषि भूमि से पाइपलाइन डाली जा रही है। ग्रामीणों ने इसे “जबरन कार्रवाई” करार देते हुए मांग की कि प्रशासन पहले स्पष्ट रूप से परियोजना का पूरा खाका सार्वजनिक करे और पर्यावरणीय प्रभाव की जानकारी साझा करे।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई कि ट्रीटमेंट के बावजूद सीवरेज का पानी पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता, जिससे जलस्रोतों और आसपास की खेती पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
प्रशासन सतर्क, पुलिस बल तैनात
स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, परियोजना सभी वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत संचालित की जा रही है और ट्रीट किया गया पानी निर्धारित मानकों के अनुरूप है।
हालांकि, ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं किया जाता और लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक वे कार्य शुरू नहीं होने देंगे।
पर्यावरण और धार्मिक आस्था बना मुद्दा
यह विवाद केवल भूमि अधिग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण और धार्मिक आस्था का मुद्दा भी इसमें जुड़ गया है। काली बेईं को क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी प्रकार का अपशिष्ट जल, चाहे वह ट्रीटेड ही क्यों न हो, इसमें प्रवाहित करना उचित नहीं होगा।
आगे की स्थिति पर नजर
प्रशासन और ग्रामीणों के बीच वार्ता की संभावना बनी हुई है। फिलहाल इलाके में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन तनाव बरकरार है। यदि सहमति नहीं बनती है तो मामला उच्च प्रशासनिक स्तर तक पहुंच सकता है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। वहीं प्रशासन का कहना है कि विकास परियोजनाओं को पारदर्शिता और नियमों के तहत आगे बढ़ाया जाएगा।Big News
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