ग्राम पंचायत चुनाव की आहट से पहले सख्ती: 4 प्रधान जांच में दोषी, एक निलंबित

बरेली में संभावित ग्राम पंचायत चुनावों से पहले प्रशासनिक सख्ती बढ़ती नजर आ रही है। चुनाव की औपचारिक घोषणा भले ही अभी नहीं हुई हो, लेकिन गांव स्तर पर शिकायतों का सिलसिला तेज हो गया है। ग्रामीणों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों की जांच में कई मामलों में ग्राम प्रधान प्रथम दृष्टया दोषी पाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, बीते करीब सवा महीने में चार ग्राम प्रधानों पर निर्माण कार्यों में वित्तीय अनियमितता और गबन के आरोप सामने आए हैं। इन मामलों में प्रशासन ने प्रारंभिक जांच के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें से एक प्रधान को निलंबित किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य प्रधानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। दो प्रधानों को दिए गए नोटिस की समयसीमा भी पूरी हो चुकी है और जांच पूरी होने के बाद आगे की विभागीय कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
चार प्रधानों पर अलग-अलग कार्रवाई
20 जनवरी को फतेहगंज पश्चिमी ब्लॉक की तुरसा पट्टी ग्राम पंचायत की प्रधान जायदा बानो पर करीब दो लाख रुपये के गबन का आरोप सामने आया था। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद उनके वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए।
इसी दिन दमखोदा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सुकटिया याकूबगंज के प्रधान अरशद मलिक के खिलाफ भी निर्माण कार्यों में अनियमितता की शिकायतों की जांच हुई। जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर उन्हें नोटिस जारी किया गया।
22 जनवरी को नवाबगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत मुड़िया भीकमपुर की प्रधान भूपा देवी के खिलाफ भी निर्माण कार्यों में गड़बड़ी के आरोप सामने आए। प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने के बाद उन्हें भी नोटिस जारी किया गया।
इसके बाद 4 फरवरी को ग्राम पंचायत गुरूगावां मुस्तकिल की प्रधान ज्ञानो शर्मा के खिलाफ भी जांच में निर्माण कार्यों में अनियमितता सामने आई। प्रशासन ने उन्हें भी प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए नोटिस जारी किया है।
सचिवों पर भी गिरी गाज
इन मामलों में केवल प्रधान ही नहीं बल्कि संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों और वर्तमान सचिवों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी पंचायत सचिवों की भी होती है।
निर्माण कार्यों में मिलीं गड़बड़ियां
जांच में सामने आया है कि अलग-अलग पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर वित्तीय अनियमितताएं की गईं। कहीं सीसी रोड निर्माण में गड़बड़ी मिली, तो कहीं शौचालय और नाला निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और बजट को लेकर सवाल उठे हैं।
चुनाव से पहले बढ़ी निगरानी
सूत्रों का कहना है कि संभावित पंचायत चुनावों को देखते हुए प्रशासन अब विकास कार्यों और पंचायत फंड के उपयोग पर विशेष नजर बनाए हुए है। ग्रामीणों को भी शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनी रहे।
प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।






