बरेली में ‘अमृत सरोवर’ घोटाले के आरोप, लाखों खर्च के बाद भी सूखे तालाब

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना अब सवालों के घेरे में है। लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए सरोवर आज बदहाल स्थिति में हैं—कहीं पानी नहीं, तो कहीं सिर्फ जलकुंभी और जंगली घास नजर आ रही है। कई जगह तो सरोवरों पर कब्जा तक हो चुका है।
जिले के अलग-अलग ब्लॉकों में बने दर्जनों अमृत सरोवरों पर 20 लाख से लेकर 70 लाख रुपये तक खर्च किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।
लाखों खर्च, लेकिन न पानी न रखरखाव
बरेली के आलमपुर जाफराबाद, बहेड़ी, भदपुरा, भोजीपुरा, भुता, फरीदपुर, मझगवां और नवाबगंज ब्लॉकों में करोड़ों रुपये खर्च कर सरोवर बनाए गए।
कहीं 23 लाख, कहीं 40 लाख और कहीं 70 लाख तक की लागत से बने इन तालाबों में आज पानी का नामोनिशान नहीं है।
कई स्थानों पर 2500 से 3500 मानव दिवस तक मजदूरों से काम कराया गया, लेकिन परिणाम शून्य रहा। सरोवर अब या तो सूखकर मैदान बन चुके हैं या फिर जलकुंभी और झाड़ियों से पट गए हैं।
जमीनी हकीकत: सरोवर नहीं, ‘घास का मैदान’
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ठिरिया कल्याणपुर (मीरगंज): 2022-23 में बना सरोवर पूरी तरह सूखा पड़ा है। ग्रामीणों ने उस पर कब्जा कर लिया है और वहां उपले तक पाथे जा रहे हैं।
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फैजनगर (भुता): 4 लाख की लागत से बना सरोवर अब घास और कूड़े का ढेर बन चुका है।
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ककरा खुर्द: ग्रामीणों का आरोप है कि सिर्फ खानापूर्ति कर पैसा निकाल लिया गया, कभी सफाई नहीं हुई।
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शिवपुरी (फरीदपुर): 3.9 लाख खर्च के बावजूद सरोवर में पानी नहीं, बल्कि गंदगी का अंबार है।
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लमखेड़ा (भदपुरा): निर्माण के बाद कोई देखने तक नहीं आया, सिर्फ शिलापट्ट लगा दिया गया।
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शहबाजपुर (मझगवां): 16 लाख का एस्टीमेट, लेकिन साढ़े तीन लाख खर्च कर काम अधूरा छोड़ दिया गया।
इन सभी मामलों में एक समान स्थिति दिख रही है—निर्माण के बाद रखरखाव पूरी तरह गायब है।
ग्रामीणों का आरोप: “सिर्फ पैसा निकाला गया”
कई गांवों के लोगों ने आरोप लगाया है कि अमृत सरोवर के नाम पर सिर्फ कागजी काम हुआ और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
कहीं शिलापट्ट पर जानकारी तक नहीं लिखी गई, तो कहीं शिलापट्ट ही गायब हो गए।
ग्रामीणों के मुताबिक, न तो नियमित सफाई होती है और न ही जल संरक्षण की कोई व्यवस्था की गई है।





