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उत्तरप्रदेश

3.62 करोड़ का टैंक बना ‘मौत का ढांचा’! लखनऊ की टीएसी टीम ने भरे नमूने, जांच की निष्पक्षता पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

बरेली। आंवला तहसील के ग्राम पंचायत सरदार नगर में 3.62 करोड़ रुपये की लागत से बना ओवरहेड टैंक भरभराकर गिरने के बाद अब पूरे प्रदेश में जल निगम की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। हादसे के दूसरे दिन मंगलवार को लखनऊ से पहुंची टीएसी (टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी) टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर मलबे से कंक्रीट, सीमेंट, सरिया और ईंट समेत नौ प्रकार के नमूने एकत्र किए।

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राज्य पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की विशेषज्ञ टीम चीफ टेक्निकल एडवाइजर विश्वदीपक के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। टीम ने ढहे टैंक के निर्माण स्थल, उसकी संरचना और आसपास की जमीन का गहन निरीक्षण किया। जांच के दौरान जल निगम ग्रामीण की एक्सईएन कुमकुम गंगवार समेत कई अभियंता भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि एकत्र किए गए नमूनों की जांच कानपुर आईआईटी, पीडब्ल्यूडी लैब और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों में कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने में लगभग एक माह का समय लग सकता है।
तालाब पाटकर बना दिया टैंक?
जांच के दौरान ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए कि ओवरहेड टैंक का निर्माण तालाब की जमीन को भरकर कराया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि जहां टैंक बनाया गया, वहां आज भी पानी और जलकुंभी मौजूद है। ऐसे में निर्माण स्थल चयन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने दावा किया कि शुरुआत से ही निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की गई और घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ।
“जिस कंपनी पर आरोप, वही जांच में शामिल”
घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया जब उन्होंने आरोप लगाया कि जिस कार्यदायी संस्था एनसीसी लिमिटेड पर घटिया निर्माण सामग्री इस्तेमाल करने के आरोप हैं, उसी कंपनी के कर्मचारी जांच के दौरान नमूने भराने में शामिल दिखाई दिए।
गांव की प्रधान नसरीन फातिमा के पति सरताज मंसूरी, अवनेश पाठक, राकेश मोहन, कल्लू भारती और संजीव पाठक समेत कई ग्रामीणों ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर आरोपी संस्था के लोग ही जांच प्रक्रिया में शामिल रहेंगे तो निष्पक्ष रिपोर्ट कैसे आएगी। ग्रामीणों ने पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
हालांकि जल निगम ग्रामीण के मुख्य अभियंता आरबी राम ने ग्रामीणों के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि नमूने भरने के दौरान केवल मजदूरों की मदद ली गई थी, कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों का कोई सहयोग नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रक्रिया को ग्रामीण शायद ठीक तरह से समझ नहीं पाए।
हादसे के बाद शासन सख्त, इंजीनियरों पर कार्रवाई
सोमवार शाम हुए इस हादसे में पांच ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया। परियोजना में भ्रष्टाचार और निर्माण में लापरवाही के आरोप सामने आने लगे।
जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल निगम ग्रामीण के अवर अभियंता और सहायक अभियंता पर कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही कार्यदायी संस्था एनसीसी लिमिटेड और टीपीआई बीएलजी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया।
मंगलवार को प्रमुख सचिव ने भी वर्चुअल बैठक कर पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी ली और सख्त जांच के साथ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए।
रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर डेढ़ साल पहले बना करोड़ों का ओवरहेड टैंक इतनी जल्दी कैसे ढह गया? क्या निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ? क्या मानकों की अनदेखी की गई? या फिर जमीन चयन में ही भारी लापरवाही बरती गई?
इन सवालों के जवाब अब टीएसी टीम की जांच रिपोर्ट से सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल सरदार नगर हादसा सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन चुका है।

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