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बरेली

UP कैबिनेट के बड़े फैसले: किसानों को अतिरिक्त भुगतान, बिजनेस पार्क नीति को मंजूरी

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उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों, उद्योग और शहरी विकास को केंद्र में रखते हुए कई अहम फैसले लिए हैं। सोमवार को लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 39 प्रस्ताव रखे गए, जिनमें से 37 को मंजूरी दे दी गई, जबकि दो प्रस्तावों को फिलहाल स्थगित रखा गया है।

किसानों को मिलेगा अतिरिक्त लाभ

बैठक का मुख्य फोकस किसानों की आय बढ़ाने पर रहा। सरकार ने रबी विपणन सत्र के लिए गेहूं खरीद नीति को स्पष्ट करते हुए किसानों को राहत देने का फैसला किया है। कृषि विभाग के अनुसार, अब किसानों को उतराई, छनाई और सफाई के लिए 20 रुपये प्रति कुंतल अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इस फैसले से किसानों की लागत कम होगी और उनकी आय में सीधा इजाफा होगा। इस वर्ष प्रदेश में अच्छी फसल उत्पादन की संभावना को देखते हुए पर्याप्त खरीद सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को किसी तरह का नुकसान न उठाना पड़े।

औद्योगिक विकास प्राधिकरण नियमावली-2026 को मंजूरी

कैबिनेट ने “औद्योगिक विकास प्राधिकरण केंद्रीयकृत सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2026” को भी मंजूरी दे दी है। इस संशोधन का उद्देश्य विभिन्न औद्योगिक प्राधिकरणों के कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों में एकरूपता लाना है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण जैसे संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को समान अवसर और बेहतर सेवा ढांचा मिलेगा। इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ने और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

निजी बिजनेस पार्क नीति-2025 को हरी झंडी

राज्य सरकार ने “उत्तर प्रदेश निजी बिजनेस पार्क विकास योजना-2025” को भी मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत प्रदेश में आधुनिक, विश्वस्तरीय प्लग-एंड-प्ले बिजनेस पार्क विकसित किए जाएंगे, जिससे निवेश आकर्षण और रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी होगी।

इन बिजनेस पार्कों में कंपनियों को कार्यालय, R&D केंद्र, लॉजिस्टिक्स हब और अन्य सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में लगने वाला समय और लागत कम होगी।

DBFOT मॉडल पर होगा विकास

इस योजना को DBFOT (Design, Build, Finance, Operate and Transfer) मॉडल के तहत लागू किया जाएगा, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक बिजनेस पार्क को 45 वर्षों की रियायत अवधि के लिए विकसित किया जाएगा, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकेगा।

सरकार का मानना है कि इस नीति से प्रदेश को निवेश के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा और MSME तथा स्टार्टअप सेक्टर को भी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

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