दिल्ली बनी दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी, WHO मानकों से 16 गुना ज्यादा PM2.5
World Air Quality Report 2025 के अनुसार दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बनी। PM2.5 स्तर WHO मानकों से 16 गुना अधिक, भारत छठा सबसे प्रदूषित देश।

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच भारत की राजधानी दिल्ली को लेकर एक बार फिर गंभीर चेतावनी सामने आई है। World Air Quality Report 2025 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली लगातार दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बनी हुई है। रिपोर्ट ने राजधानी की खराब होती एयर क्वालिटी को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में पीएम 2.5 (PM2.5) का वार्षिक औसत स्तर 82.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है, जो World Health Organization (WHO) द्वारा तय सुरक्षित सीमा से करीब 16 गुना अधिक है।
मौसमी नहीं, अब स्थायी संकट
स्विस एयर क्वालिटी टेक्नोलॉजी कंपनी IQAir द्वारा जारी इस रिपोर्ट में 143 देशों के 9,400 से अधिक शहरों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि दिल्ली समेत भारत के कई शहरों में वायु प्रदूषण अब केवल सर्दियों तक सीमित समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर संरचनात्मक संकट बन चुका है।
निजी वाहन और SUV बने बड़ी वजह
Greenpeace India के क्लाइमेट एंड एनर्जी कैंपेनर आकिज फारूक ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि अब प्रदूषण के लिए केवल पराली जलाने या मौसम को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्रों में निजी वाहनों, खासकर भारी SUVs की बढ़ती संख्या प्रदूषण का प्रमुख कारण बन रही है। इससे कार्बन उत्सर्जन लगातार बढ़ रहा है और शहरों की हवा अधिक विषैली होती जा रही है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि सक्षम नागरिकों को सप्ताह में कुछ दिन निजी वाहनों के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करना चाहिए, जिससे प्रदूषण में कमी लाई जा सके।
वैश्विक स्तर पर भी स्थिति गंभीर
रिपोर्ट के वैश्विक आंकड़े भी बेहद चिंताजनक हैं—
- दुनिया के केवल 14% शहर ही WHO के सुरक्षित मानकों (5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) पर खरे उतर पाए हैं।
- जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ रही जंगलों की आग भी प्रदूषण का बड़ा कारण बन रही है।
- परिवहन, उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र से निकलने वाला उत्सर्जन लगातार प्रदूषण को बढ़ा रहा है।
- अफ्रीका और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों में न केवल प्रदूषण अधिक है, बल्कि इसे मापने के बुनियादी ढांचे की भी भारी कमी है।
भारत के लिए ‘Wake-Up Call’
World Air Quality Report 2025 को विशेषज्ञ भारत के लिए एक स्पष्ट चेतावनी मान रहे हैं। उनका कहना है कि अब केवल मौसमी उपायों, जैसे सर्दियों या त्योहारों के दौरान सख्ती, से काम नहीं चलेगा।
सरकार को ऊर्जा, परिवहन और शहरी नियोजन के स्तर पर दीर्घकालिक और ठोस नीतिगत बदलाव करने होंगे।
बढ़ता प्रदूषण खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए गंभीर स्वास्थ्य खतरा बनता जा रहा है, जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था और भविष्य पर भी पड़ सकता है।






