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बहेड़ी में भाजपा की अंदरूनी लड़ाई, टिकट के लिए बढ़ी बेचैनी।

बहेड़ी में भाजपा की अंदरूनी खींचतान तेज, टिकट को लेकर बढ़ी सरगर्मी

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बरेली। 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए बहेड़ी सीट पर भारतीय जनता पार्टी के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। संभावित दावेदारों की बढ़ती संख्या ने इस सीट को एक “हॉट पॉलिटिकल जोन” में तब्दील कर दिया है, जहां हर नेता खुद को सबसे मजबूत उम्मीदवार साबित करने की कोशिश में लगा है। सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिर पार्टी का भरोसा किस पर टिकेगा।


तीन प्रमुख समीकरणों पर टिकी सियासत

बहेड़ी की राजनीति इस समय तीन अहम कारकों के इर्द-गिर्द घूम रही है—राजनीतिक विरासत, संगठनात्मक पकड़ और जातीय समीकरण। यही तीनों पहलू टिकट के चयन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

झारखंड के राज्यपाल Santosh Gangwar की पुत्री Shruti Gangwar इस दौड़ में प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं। उनका राजनीतिक बैकग्राउंड, शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच और साफ छवि उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है। महिला और युवा मतदाताओं के बीच उनकी संभावित पकड़ पार्टी के लिए फायदेमंद मानी जा रही है।

वहीं सांसद Chhatrapal Singh Gangwar के भतीजे Dushyant Gangwar युवा और सक्रिय नेता के रूप में चर्चा में हैं। संगठन में युवाओं को बढ़ावा देने की रणनीति के बीच उनका दावा भी मजबूत नजर आता है।


जमीनी पकड़ और जातीय समीकरण भी अहम

ब्लॉक प्रमुख Bhupendra Kurmi को नजरअंदाज करना आसान नहीं है। पंचायत स्तर पर उनकी मजबूत पकड़, कुर्मी समाज में प्रभाव और विकास कार्यों में सक्रियता उन्हें एक मजबूत “ग्रासरूट लीडर” के रूप में स्थापित करती है। बहेड़ी जैसे क्षेत्र में जातीय संतुलन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां उनका प्रभाव निर्णायक साबित हो सकता है।

दूसरी ओर Sunil Gangwar संगठन के अनुभवी और विश्वसनीय चेहरों में गिने जाते हैं। बूथ स्तर तक उनकी सक्रियता और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ उन्हें एक शांत लेकिन प्रभावशाली दावेदार बनाती है।


भाजपा की रणनीति क्या संकेत देती है?

भारतीय जनता पार्टी अब उम्मीदवार चयन में केवल लोकप्रियता तक सीमित नहीं रहती। पार्टी ऐसे चेहरे को प्राथमिकता देती है जो जीत सुनिश्चित कर सके, संगठन को मजबूत बनाए रखे, जातीय समीकरण साध सके और स्थानीय स्तर पर स्वीकार्य हो।

इस लिहाज से बहेड़ी सीट पर टिकट का फैसला “हाईकमान और लोकल फीडबैक” के संतुलन के आधार पर होने की संभावना है।


किसके पक्ष में झुकेगा पलड़ा?

मौजूदा स्थिति का आकलन करें तो मुकाबला चार अलग-अलग आयामों में बंटा नजर आता है—

  • हाई प्रोफाइल और साफ छवि: श्रुति गंगवार
  • युवा और सक्रिय नेतृत्व: दुष्यंत गंगवार
  • जातीय और जमीनी समीकरण: भूपेंद्र कुर्मी
  • संगठनात्मक अनुभव: सुनील गंगवार

बहेड़ी सीट पर भाजपा के लिए यह चुनाव केवल प्रत्याशी चयन का मामला नहीं, बल्कि सही राजनीतिक संतुलन साधने की परीक्षा है। एक गलत निर्णय पार्टी के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है, जबकि सही रणनीति मजबूत जीत का रास्ता खोल सकती है।

अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व अनुभव, युवा ऊर्जा, जातीय प्रभाव या राजनीतिक विरासत—किसे प्राथमिकता देता है। क्योंकि बहेड़ी में इस बार मुकाबला सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि सियासी प्रतिष्ठा का भी है।

रिपोर्ट – देवेंद्र पटेल

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