पंचायत चुनाव को लेकर प्रधान संगठनों ने सरकार पर बढ़ाया दबाव, आंवला में उठी कार्यकाल बढ़ाने की मांग

पंचायत चुनाव को लेकर प्रधान संगठनों ने सरकार पर बढ़ाया दबाव, आंवला में उठी कार्यकाल बढ़ाने की मांग
रिपोर्ट: देवेंद्र पटेल
बरेली। पंचायत चुनावों को लेकर अब प्रदेश भर में ग्राम प्रधानों की सक्रियता बढ़ने लगी है। बरेली के आंवला क्षेत्र में रविवार को अखिल भारतीय प्रधान संगठन के नेतृत्व में बड़ी बैठक आयोजित की गई, जिसमें ग्राम प्रधानों ने पंचायत चुनाव समय पर कराने अथवा प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग जोरशोर से उठाई। संगठन के पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
बैठक का नेतृत्व संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष राजवीर सिंह लोधी ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान और पंचायत प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रधानों का कहना था कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को पंचायत चुनाव को लेकर जल्द स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए, ताकि गांवों में विकास कार्य प्रभावित न हों। प्रधान प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि किसी कारणवश समय पर चुनाव कराना संभव नहीं है तो मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाना चाहिए।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे अहम कड़ी हैं और यदि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्थाएं लागू होती हैं तो विकास कार्यों की गति धीमी पड़ सकती है। प्रधानों ने यह भी कहा कि गांवों में सड़क, सफाई, आवास, पेयजल और मनरेगा जैसे कार्य सीधे पंचायतों के माध्यम से संचालित होते हैं, इसलिए पंचायत व्यवस्था में किसी प्रकार का शून्य पैदा नहीं होना चाहिए।
इसी क्रम में पंचायती राज प्रधान संगठन के पदाधिकारियों ने भी अलग बैठक कर पंचायत चुनाव समय पर कराने और साथ ही आवश्यकता पड़ने पर कार्यकाल बढ़ाने की मांग रखी। दोनों संगठनों ने सरकार का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए शक्ति प्रदर्शन का भी संकेत दिया। प्रधान प्रतिनिधियों का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने का काम करते हैं और उनकी अनदेखी राजनीतिक रूप से भी भारी पड़ सकती है।
बैठक में कई प्रधानों ने खुलकर कहा कि आने वाले समय में विधानसभा चुनाव भी नजदीक हैं और पंचायत प्रतिनिधियों की नाराजगी का असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। प्रधान संगठनों ने सरकार को संदेश देते हुए कहा कि यदि समय रहते पंचायत प्रतिनिधियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो इसका राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
प्रधान संगठनों की इस सक्रियता को अब आगामी पंचायत और विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। ग्रामीण राजनीति में पंचायत प्रतिनिधियों की मजबूत पकड़ को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक गरमा सकता है।






