घूसखोर लेखपाल को 5 साल की सजा, एंटी करप्शन कोर्ट का सख्त संदेश— “भ्रष्टाचार पर नरमी नहीं”
खेत की पैमाइश के बदले मांगी थी 4 हजार रुपये की रिश्वत

बरेली। भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसले में बरेली की भ्रष्टाचार निवारण (एंटी करप्शन) कोर्ट ने नवाबगंज तहसील के तत्कालीन लेखपाल रामचन्द्र को रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराते हुए 5 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) कमलेश्वर पाण्डेय की अदालत ने सुनाया।
“भ्रष्टाचार समाज की जड़ें खोखली करता है” : कोर्ट
सजा सुनाते हुए न्यायाधीश कमलेश्वर पाण्डेय ने भ्रष्टाचार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि—
“भ्रष्टाचार सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि यह आम नागरिक के अधिकारों और सपनों की हत्या है। जब एक हाथ रिश्वत लेता है और दूसरा देता है तो हार हमेशा ईमानदार नागरिक की होती है। भ्रष्टाचार समाज की जड़ों को खोखला करता है, इसलिए ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती।”
खेत की पैमाइश के बदले मांगी थी 4 हजार रुपये की रिश्वत
मामले के अनुसार, नवाबगंज क्षेत्र निवासी रामपाल सिंह ने 16 जनवरी 2020 को भ्रष्टाचार निवारण संगठन, बरेली में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनकी पत्नी के नाम दर्ज कृषि भूमि की पैमाइश और चकरोड हटाने की कार्रवाई के बदले तत्कालीन लेखपाल रामचन्द्र ने 4 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।
एंटी करप्शन टीम ने बिछाया जाल
शिकायत की प्रारंभिक जांच निरीक्षक सुरेश दत्त मिश्रा ने की, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद 18 जनवरी 2020 को ट्रैप टीम गठित की गई।
20 जनवरी 2020 को शिकायतकर्ता को पांच-पांच सौ रुपये के आठ नोट (कुल 4 हजार रुपये) फिनॉल्फ्थेलीन पाउडर लगाकर दिए गए। स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में नोटों के नंबर दर्ज किए गए।
रंगे हाथ पकड़ा गया लेखपाल
दोपहर करीब 12:35 बजे नवाबगंज तहसील परिसर में शिकायतकर्ता ने लेखपाल रामचन्द्र को रिश्वत के रुपये दिए। जैसे ही आरोपी ने नोट हाथ में लेकर गिने, पहले से घात लगाए एंटी करप्शन ट्रैप दल ने उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
हाथ धुलवाने पर घोल गुलाबी हो गया, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई। आरोपी के कब्जे से वही 4 हजार रुपये, मोबाइल फोन, ड्राइविंग लाइसेंस, एसबीआई डेबिट कार्ड और अन्य सामान भी बरामद किया गया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश
अदालत के इस फैसले को भ्रष्टाचार के मामलों में एक अहम संदेश माना जा रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक पद पर बैठा व्यक्ति यदि रिश्वत लेकर अपने कर्तव्यों का दुरुपयोग करता है तो उसके प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कानून का शिकंजा लगातार मजबूत हो रहा है।






