एक बारिश में खुली ‘स्मार्ट सिटी’ की पोल, सड़कें बनीं तालाब; पार्षद ने थर्माकोल की नाव चलाकर जताया विरोध।

राजेंद्रनगर रामजानकी मंदिर से शिवाजी चौक तक जलभराव, बेसमेंट में घुसा पानी; पार्षद जयप्रकाश राजपूत ने नगर निगम की व्यवस्था पर उठाए सवाल।
बरेली। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बारिश ने एक बार फिर जलनिकासी व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी। राजेंद्रनगर स्थित रामजानकी मंदिर से शिवाजी चौक तक सड़क के दोनों ओर भारी जलभराव हो गया। कई स्थानों पर हालात ऐसे बने कि सड़कें तालाब जैसी नजर आने लगीं और पानी आसपास के भवनों व दुकानों के बेसमेंट तक पहुंच गया।
जलभराव से नाराज सिकलापुर के पार्षद जयप्रकाश राजपूत ने थर्माकोल की नाव पर बैठकर विरोध जताया। उनका यह अनोखा प्रदर्शन शहर की जलनिकासी व्यवस्था पर तंज के रूप में देखा गया। पार्षद ने आरोप लगाया कि मानसून से पहले नगर निगम ने नालों के ऊपर हुए बड़े अतिक्रमणों को प्रभावी ढंग से नहीं हटाया और न ही जलनिकासी के पर्याप्त इंतजाम किए, जिसका खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
करोड़ों खर्च, फिर भी बारिश में बाढ़ जैसे हालात
शहर में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, सड़क, नाला और जलनिकासी से जुड़े कार्यों पर बड़ी धनराशि खर्च होने के बावजूद बारिश के बाद कई इलाकों में पानी भरने से सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नालों की समय रहते सफाई, अतिक्रमण हटाने और पानी की निकासी की ठोस व्यवस्था की जाती तो हालात इतने खराब नहीं होते।
राजेंद्रनगर और आसपास के क्षेत्र में जलभराव के कारण राहगीरों, दुकानदारों और स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वाहनों को पानी के बीच से निकलना पड़ा, जबकि बेसमेंट में पानी पहुंचने से सामान खराब होने का भी खतरा बना रहा।
पार्षद बोले—समय रहते हटते अतिक्रमण तो नहीं बनते ऐसे हालात
पार्षद जयप्रकाश राजपूत ने आरोप लगाया कि वर्षा से पहले नालों पर किए गए बड़े अतिक्रमण हटाने और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने में जिम्मेदार विभाग गंभीर नहीं रहे। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई की गई होती तो शहर में इस तरह जलभराव की नौबत नहीं आती।
सवालों के घेरे में जिम्मेदार
बारिश के बाद बने हालात ने नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़े विकास कार्यों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब हर वर्ष मानसून से पहले नाला सफाई और जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं, तो बारिश होते ही शहर के प्रमुख क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात क्यों बन जाते हैं।
चुनावों के दौरान शहर को बेहतर सड़कें, जलनिकासी और आधुनिक सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जलभराव की यह तस्वीरें जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही हैं। अब नजर इस बात पर है कि जिम्मेदार विभाग समस्या का स्थायी समाधान कब तक करते हैं।






