राशन में घटतौली के आरोप पर भड़के ग्रामीण, जांच करने पहुंचे अधिकारियों के सामने हंगामा

राशन में घटतौली पर भड़के ग्रामीण, जांच के बीच हंगामा; कार्रवाई न होने पर उठाए सवाल
पहारपुर बसावन नगरिया के कार्डधारकों ने कोटेदार पर एक से दो किलो कम राशन देने और अभद्रता का लगाया आरोप, एसडीएम को शपथ पत्र देकर कार्रवाई की मांग
Highlights
– कार्डधारकों का आरोप—हर बार दिया जा रहा एक किलो कम राशन, बाहर तौलने पर दो किलो तक का अंतर
– जांच के लिए अधिकारी पहुंचे तो ग्रामीणों ने खुलकर दर्ज कराईं शिकायतें
– कोटेदार पर अभद्रता और गाली-गलौज करने के भी आरोप
– ग्रामीणों ने एसडीएम को शपथ पत्र देकर निष्पक्ष जांच और कोटा निरस्त करने की उठाई मांग
– बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने पर आपूर्ति विभाग की जांच प्रक्रिया पर सवाल
बरेली/बिथरी चैनपुर। सरकारी राशन वितरण में कथित घटतौली और कार्डधारकों से अभद्र व्यवहार को लेकर ग्राम पंचायत पहारपुर बसावन नगरिया में ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। शिकायतों की जांच के लिए अधिकारी गांव पहुंचे तो कार्डधारकों ने उनके सामने जमकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से उन्हें निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जा रहा है, लेकिन लगातार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी सदर को शपथ पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों की ओर से एसडीएम सदर को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत पहारपुर बसावन नगरिया में उचित दर की दुकान नीलम देवी के नाम से संचालित है, जबकि राशन वितरण का कार्य विजय बहादुर द्वारा किया जाता है। आरोप है कि राशन लेने पहुंचने वाले कार्डधारकों से अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज की जाती है।
कार्डधारकों का आरोप—एक किलो कम देते हैं, बाहर तौला तो दो किलो तक निकला कम
शिकायतकर्ताओं का सबसे गंभीर आरोप राशन की मात्रा को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि वितरण के दौरान प्रत्येक कार्डधारक को निर्धारित मात्रा से करीब एक किलो कम राशन दिया जाता है। आरोप है कि कुछ कार्डधारकों ने राशन बाहर ले जाकर दोबारा तौल कराया तो वजन में करीब दो किलो तक का अंतर सामने आया। इसी आधार पर ग्रामीणों ने वितरण में इस्तेमाल होने वाले कांटे की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजना का उद्देश्य गरीब, मजदूर और जरूरतमंद परिवारों को पूरा खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। यदि निर्धारित मात्रा से राशन कम दिया जा रहा है तो इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
जांच करने पहुंचे अधिकारी, ग्रामीणों ने सामने रखीं शिकायतें
मामले की शिकायत के बाद अधिकारी जांच के लिए गांव पहुंचे। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए और उन्होंने राशन वितरण को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। ग्रामीणों ने जांच अधिकारियों के सामने घटतौली और व्यवहार से जुड़ी शिकायतें रखीं तथा कार्रवाई की मांग की।
कार्डधारकों का सवाल था कि यदि शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो मामले में ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। ग्रामीणों ने जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाते हुए उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
‘योगी सरकार में भी पूरा राशन नहीं मिल रहा’
कुछ कार्डधारकों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा कि सरकार पात्र परिवारों के लिए राशन भेज रही है, लेकिन उन्हें निर्धारित मात्रा में पूरा खाद्यान्न नहीं मिलने का आरोप है। ग्रामीणों ने मांग की कि वितरण व्यवस्था की मौके पर निष्पक्ष जांच कराई जाए और कार्डधारकों के बयान दर्ज किए जाएं।
एसडीएम को शपथ पत्र, कोटा निरस्त करने की मांग
ग्रामीणों ने एसडीएम सदर को दिए शिकायती पत्र एवं शपथ पत्र में कहा है कि शिकायत किसी दबाव में नहीं की गई है। शिकायतकर्ताओं ने हस्ताक्षर और अंगूठा निशान लगाकर आरोपों की जांच कराने की मांग की है। साथ ही कहा है कि आरोप सही पाए जाने पर उचित दर की दुकान का आवंटन निरस्त करने समेत नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
आपूर्ति विभाग की कार्रवाई पर निगाह
अब पूरे मामले में प्रशासन और आपूर्ति विभाग की जांच पर ग्रामीणों की निगाह टिकी है। बड़ा सवाल यह है कि कार्डधारकों की ओर से लगाए गए घटतौली और अभद्रता के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं या नहीं और उसके आधार पर विभाग क्या कार्रवाई करता है।
नोट: खबर में घटतौली, अभद्रता और अन्य अनियमितताओं से संबंधित बातें ग्रामीणों के शिकायती पत्र एवं उनके आरोपों पर आधारित हैं। संबंधित कोटेदार और आपूर्ति विभाग का पक्ष मिलने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।






