चीनी के बढ़ते दाम पर व्यापार मंच का विरोध, गरीबों को हर माह पांच किलो मुफ्त देने की मांग।

मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, जमाखोरी की जांच और महंगाई पर नियंत्रण की उठाई मांग; आंदोलन की दी चेतावनी।
रिपोर्ट देवेंद्र पटेल बरेली
बरेली। चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंच ने नाराजगी जताते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। संगठन ने गरीब परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से हर महीने पांच किलो चीनी मुफ्त देने की मांग की है। व्यापारियों का दावा है कि पिछले 15 से 20 दिनों में चीनी के भाव में 20 से 25 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों का रसोई बजट प्रभावित हो रहा है।
शनिवार को उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंच के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीएम फर्स्ट को सौंपा। पदाधिकारियों ने कहा कि पहले से ही रसोई गैस, अनाज, पेट्रोल-डीजल समेत अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों का बोझ आम लोगों पर है। अब चीनी के दाम में तेजी ने परिवारों की परेशानी और बढ़ा दी है।
गन्ना किसान की आय नहीं बढ़ी, फिर चीनी इतनी महंगी क्यों?
जिलाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने कहा कि एक ओर गन्ना किसानों की आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है, वहीं दूसरी ओर बाजार में चीनी की कीमत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसानों को उसी अनुपात में लाभ नहीं मिल रहा तो चीनी के दामों में अचानक इतनी तेजी क्यों आई। संगठन ने संभावित जमाखोरी और अन्य कारणों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
एथेनॉल नीति पर भी उठाए सवाल
व्यापार मंच ने एथेनॉल उत्पादन को लेकर अपनाई जा रही नीति पर भी सवाल उठाए। पदाधिकारियों का कहना है कि चीनी उत्पादन से जुड़े संसाधनों के इस्तेमाल और एथेनॉल उत्पादन पर बढ़ते जोर का चीनी की उपलब्धता एवं कीमतों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, इसकी समीक्षा की जानी चाहिए। ज्ञापन में एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर वाहन मालिकों की समस्याओं का मुद्दा भी उठाया गया।
गरीब परिवारों को पीडीएस से मिले पांच किलो चीनी
व्यापार मंच ने मुख्यमंत्री से आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने की मांग की। साथ ही गरीब परिवारों को राहत देने के लिए पीडीएस के माध्यम से प्रत्येक माह पांच किलो चीनी मुफ्त उपलब्ध कराने की मांग उठाई।जिलाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार को महंगाई से राहत देने के लिए जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होगा।





