दिल्ली में आंधी का कहर: पेड़ गिरने से ढहा मकान, मां और तीन मासूमों की दर्दनाक मौत, पति गंभीर घायल

दिल्ली। राजधानी दिल्ली में शुक्रवार की सुबह प्रकृति का कहर एक हंसते-खेलते परिवार पर टूट पड़ा। द्वारका जिले के जाफरपुर कलां इलाके में खड़खड़ी नहर गांव में तेज आंधी के चलते एक नीम का विशाल पेड़ खेत में बने ट्यूबवेल के कमरे पर आ गिरा। उस समय कमरे में एक महिला अपने तीन मासूम बच्चों के साथ सो रही थी। हादसे में चारों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि महिला का पति गंभीर रूप से घायल हो गया।
सुबह 5 बजे गूंजा चीख-पुकार का मंजर
यह दिल दहला देने वाला हादसा सुबह करीब 5 बजे हुआ। मलबे में दबे लोगों की चीख-पुकार सुनकर गांव में अफरा-तफरी मच गई। फौरन फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। सुबह 5:25 बजे फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। हालांकि मलबा इतना भारी था कि जान बचाना मुश्किल हो गया। चारों शवों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया।
मां और बच्चों की मौत, घायल पति अस्पताल में भर्ती
हादसे में मरने वालों की पहचान 26 वर्षीय ज्योति और उसके तीन बच्चों के रूप में हुई है। वहीं पति अजय कुशवाह मलबे में दबने से गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
गांव में पसरा मातम, टूट गया खुशियों का आशियाना
हादसे के बाद पूरे खड़खड़ी नहर गांव में मातम छा गया है। पड़ोसी और रिश्तेदार स्तब्ध हैं कि एक पेड़ ने पलभर में चार जिंदगियां लील लीं। गांववालों की आंखें नम हैं और हर किसी की जुबां पर बस यही सवाल है – क्या यह सब अचानक था, या कोई लापरवाही भी जिम्मेदार है?
प्रशासन से मुआवजे की मांग, जांच में जुटी पुलिस
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे की विस्तृत जांच की जा रही है। प्राथमिक जांच में घटना का कारण तेज आंधी और पुराने पेड़ की जड़ें कमजोर होना बताया जा रहा है।
मौसम विभाग ने फिर चेताया, रहें सतर्क
इस दर्दनाक हादसे के बीच मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर में अगले कुछ दिनों तक तेज हवाओं और बारिश का अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने, खुले स्थानों और पुराने पेड़ों से दूर रहने की अपील की है।
एक मां का ममता भरा आंचल और तीन नन्हे सपने हमेशा के लिए खामोश हो गए
इस हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ा, बल्कि पूरे इलाके को झकझोर दिया। मां और उसके बच्चों की एक साथ मौत ने हर किसी को भावुक कर दिया है। यह हादसा एक बार फिर सोचने को मजबूर करता है – क्या कुदरत का यह कहर टल सकता था?





