पीएम-उषा से रुहेलखंड विश्वविद्यालय को 100 करोड़ का अनुदान

बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के तहत 100 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। इस अनुदान से विश्वविद्यालय में डिजिटल लर्निंग हब, इन्क्यूबेशन पायलट फैसिलिटी और इंटरनेशनल ट्रांजिट छात्रावास जैसी अत्याधुनिक परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। इन योजनाओं के माध्यम से विश्वविद्यालय में शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा।
ई-कंटेंट, ऑनलाइन कोर्स और हाइब्रिड लर्निंग का केंद्र बनेगा डिजिटल हब
डिजिटल लर्निंग हब को ई-कंटेंट निर्माण, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों और हाइब्रिड लर्निंग के लिए एक वन-स्टॉप सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे रुहेलखंड क्षेत्र में ऑनलाइन शिक्षा को नया आयाम मिलेगा। खास बात यह है कि नौकरीपेशा और दूर-दराज के छात्र भी गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा से जुड़ सकेंगे। विश्वविद्यालय के 11 पाठ्यक्रमों को यूजीसी से स्वीकृति मिल चुकी है, जिन्हें डिजिटल और हाइब्रिड मोड में संचालित किया जाएगा।
तीन बड़ी परियोजनाओं पर टिका विश्वविद्यालय का भविष्य
विश्वविद्यालय में बदलाव की यह बयार तीन प्रमुख परियोजनाओं पर आधारित है, डिजिटल लर्निंग हब, इन्क्यूबेशन पायलट फैसिलिटी, इंटरनेशनल ट्रांजिट छात्रावास
इन सभी परियोजनाओं को 2026 तक धरातल पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है। इससे शोध कार्यों को बढ़ावा मिलेगा, स्टार्टअप संस्कृति को मजबूती मिलेगी और विदेशी छात्रों को भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
वैश्विक पहचान की ओर बढ़ेगा रुहेलखंड विश्वविद्यालय
पीएम-उषा के तहत मिले अनुदान से विश्वविद्यालय में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, छात्रों का लर्निंग एक्सपीरियंस बदलेगा और शोध व नवाचार को नई दिशा मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल रुहेलखंड विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाने में सहायक साबित होगी।





