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बरेली में छात्रों की आवाज़ बुलंद! धर्म-जाति-नस्ल के नाम पर हो रहे हमलों के खिलाफ सड़कों पर उतरा परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

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बरेली। पूरे देश में धर्म, जाति और नस्ल के नाम पर छात्रों-छात्राओं पर हो रहे क्रूर हमलों के खिलाफ एक बार फिर छात्र शक्ति सड़कों पर उतर आई। मंगलवार को परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) की बरेली इकाई ने जोरदार प्रदर्शन कर पूरे समाज को झकझोर दिया। संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने गुस्से और दर्द के साथ सिटी मजिस्ट्रेट को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा और दोषियों व उन्हें राजनीतिक संरक्षण देने वालों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की।

हाल की घटनाओं ने तोड़ा छात्रों का सब्र

प्रदर्शन की शुरुआत में ही बरेली कॉलेज इकाई की संयोजिका निशा ने दिल दहला देने वाली घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “केवल दो दिन पहले बरेली के राजेंद्रनगर स्थित एक रेस्तरां में एक नर्सिंग छात्रा अपनी जन्मदिन पार्टी मना रही थी। दो मुस्लिम सहपाठी भी मौजूद थे, बस इतने पर ‘लव जिहाद’ का झूठा शोर मचा कर अराजक तत्वों ने घुसकर छात्र-छात्राओं को पीटा, अपमानित किया और दहशत फैलाई।”

यह घटना किसी एक नहीं, बल्कि पूरे देश में बढ़ती असहिष्णुता की तस्वीर है।

देहरादून की दिल दहलाने वाली त्रासदी का भी जिक्र

सभा में उत्तराखंड के सेलाकुई इलाके की क्रूर घटना को भी याद किया गया। त्रिपुरा के निवासी एमबीए छात्र एंजेल चकमा को नस्लीय टिप्पणियों (“चिंकी”, “चीनी”, “मोमो”) के साथ बुरी तरह पीटा गया। गंभीर रूप से घायल एंजेल ने 17 दिन अस्पताल में जिंदगी-मौत की जंग लड़ी, लेकिन अंत में दम तोड़ दिया।

वक्ताओं ने गुस्से से कहा “क्या यह देश का ‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’ होने का दावा है? छात्र अपनी पहचान के कारण जान गंवा रहे हैं और अपराधी खुले घूम रहे हैं!”

 ‘लोकतंत्र पर सवाल, संविधान पर हमला’

शहर सचिव कैलाश ने तीखे अंदाज में कहा, “एक तरफ देश को दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्र कहा जाता है, दूसरी तरफ महिलाओं, छात्रों और अल्पसंख्यकों पर खुलेआम हमले हो रहे हैं। राजनीतिक संरक्षण के चलते अराजक तत्वों में कानून का कोई डर नहीं बचा। समाज में डर और नफरत का जहर फैल रहा है।”

 राष्ट्रपति से की गईं मुख्य मांगें

ज्ञापन में प्रमुख रूप से ये मांगें रखी गईं: छात्राओं, महिलाओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर तत्काल रोक लगाई जाए, अराजक तत्वों को संरक्षण देने वालों पर भी सख्त कार्रवाई हो, ‘लव जिहाद’ जैसे झूठे और उकसावे वाले आरोपों के नाम पर स्वतंत्रता पर हमले तुरंत बंद हों, सांप्रदायिक और फासीवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाए

युवा शक्ति का भारी जमावड़ा

प्रदर्शन में अंशिका, साक्षी मौर्या, गुंजन, सौरभ पटेल, अंकित कुमार, अर्जुन, बालकराम, हिमांशु सिंह, ओम प्रकाश, उमेश, गणेश कुमार, केपी सिंह सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।

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