No Slide Found In Slider.
Breaking News

नसबंदी के बाद भी गर्भवती हुईं 43 महिलाएं, मुआवजे की मांग पर स्वास्थ्य विभाग ने भेजी रिपोर्ट

No Slide Found In Slider.

जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबंदी कराने वाली 43 महिलाएं ऐसी सामने आई हैं, जो सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन कराने के बावजूद गर्भवती हो गईं। इनमें से अधिकांश महिलाओं के पहले से ही चार से पांच बच्चे हैं। संतानोत्पत्ति पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से उन्होंने नसबंदी कराई थी, लेकिन असफलता के बाद अब उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मुआवजे की मांग की है।

इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी महिलाओं की रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं की मांग पर आगे की कार्रवाई शासन स्तर से तय की जाएगी।

परिवार नियोजन को लेकर सरकारी अस्पतालों में नसबंदी के अलावा कापर टी, अंतरा इंजेक्शन और छाया जैसी अन्य विधियों को भी अपनाने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए अस्पतालों में अलग से परिवार नियोजन डेस्क स्थापित की गई है, जहां परामर्श और जानकारी दी जाती है।

वहीं दूसरी ओर, विभाग महिलाओं और पुरुषों दोनों को नसबंदी के लिए प्रेरित कर रहा है। इसके लिए प्रोत्साहन राशि भी निर्धारित की गई है। शासन हर वर्ष स्वास्थ्य विभाग को नसबंदी का लक्ष्य देता है। आंकड़ों के अनुसार, महिला नसबंदी का लक्ष्य तो अधिकांश वर्षों में पूरा हो जाता है, लेकिन पुरुष नसबंदी का लक्ष्य न केवल अधूरा रह जाता है बल्कि उसके आसपास तक भी नहीं पहुंच पाता।

विशेषज्ञों का मानना है कि पुरुषों में नसबंदी को लेकर जागरूकता और स्वीकार्यता की कमी है, जिसके कारण परिवार नियोजन का भार मुख्य रूप से महिलाओं पर ही आ जाता है। विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है ताकि पुरुष भी इस जिम्मेदारी को साझा करें।

इस घटना ने एक बार फिर परिवार नियोजन कार्यक्रम की चुनौतियों को उजागर किया है। जहां एक ओर महिलाओं की नसबंदी असफल होने के मामले सामने आए हैं, वहीं दूसरी ओर पुरुषों की भागीदारी बेहद कम है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इन दोनों पहलुओं पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है ताकि परिवार नियोजन कार्यक्रम प्रभावी रूप से लागू हो सके।

No Slide Found In Slider.

Live bharat TV

Related Articles

Back to top button