शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मिले अलंकार अग्निहोत्री, एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ दिल्ली में बड़े आंदोलन की तैयारी

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देकर चर्चा में आए अलंकार अग्निहोत्री ने रविवार शाम केदार घाट स्थित विद्या मठ पहुंचकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात की। शंकराचार्य के मौन व्रत पर होने के कारण दोनों के बीच संवाद इशारों में ही हुआ।
मुलाकात के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ 7 फरवरी को दिल्ली कूच करने की घोषणा दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि 6 फरवरी तक इस कानून को वापस नहीं लिया गया, तो देशभर के विभिन्न संगठनों और संस्थाओं के लोग राजधानी दिल्ली की ओर कूच करेंगे।
अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि एससी-एसटी एक्ट के तहत फर्जी मुकदमों में लोगों को फंसाया जा रहा है, जिससे समाज में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश की लगभग 85 प्रतिशत आबादी इस कानून से असहमति रखती है और सामान्य वर्ग केंद्र सरकार से नाराज है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अपने निलंबन/इस्तीफे से जुड़े प्रकरण में वे संवैधानिक तरीके से न्यायालय के माध्यम से जवाब देंगे। साथ ही कहा कि उनका आंदोलन राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय हित से जुड़ा हुआ है।
मौन व्रत के कारण नहीं हो पाई विस्तृत चर्चा
अग्निहोत्री ने बताया कि शंकराचार्य मौन व्रत पर थे, इसलिए इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी। सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े कार्य से पहले बड़ों का आशीर्वाद लेना आवश्यक होता है।
उन्होंने कहा कि जब भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू है, तो किसी विशेष वर्ग के लिए अलग कानून की आवश्यकता पर सवाल उठता है। उनका आरोप था कि विशेष कानूनों के जरिए कुछ वर्गों को अनुचित लाभ देने की मंशा दिखाई देती है।
यूजीसी नियमावली और राजनीतिक बयान
अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि यदि यूजीसी की प्रस्तावित नियमावली लागू हो जाती, तो देश में सामाजिक तनाव बढ़ सकता था। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने यह विषय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष भी रखा था, लेकिन दिल्ली स्तर तक बात प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नौकरी पर लौटने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि अभी उन्हें देशहित से जुड़े कई कार्य करने हैं। उनका कहना था कि इस पहल का उद्देश्य देश को संभावित नुकसान से बचाना है।






