बरेली में एम्स स्थापना की उम्मीदों को मिला बल, सांसद-विधायक और संगठन स्तर पर तेज हुई पैरवी

बरेली। केंद्रीय बजट में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एम्स (AIIMS) की स्थापना का प्रावधान शामिल होने के बाद बरेली में इसके निर्माण की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं। वर्षों पुरानी मांग को एक बार फिर नई ऊर्जा मिली है। बरेली समेत आसपास के जिलों के जनप्रतिनिधियों ने पहले भी कई बार प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के समक्ष एम्स स्थापना की मांग उठाई है।
कुछ माह पूर्व जनप्रतिनिधियों की पहल पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को एम्स स्थापना को लेकर पत्र भी भेजा जा चुका है। अब बजट में पश्चिमी यूपी के लिए एम्स का उल्लेख होने से इस मांग को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर मजबूती मिली है।
भौगोलिक स्थिति और भूमि उपलब्धता बरेली को बनाती है मजबूत दावेदार
बरेली एक टू-टियर शहर होने के साथ ही दिल्ली-लखनऊ कॉरिडोर के मध्य स्थित है, जिससे यहां एम्स की स्थापना की संभावना प्रबल मानी जा रही है। यदि बरेली में एम्स बनता है तो इसका लाभ केवल जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बरेली और मुरादाबाद मंडल के कई जिलों की आबादी को उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
एम्स स्थापना के लिए फतेहगंज पश्चिमी क्षेत्र में बंद पड़ी रबर फैक्ट्री की सैकड़ों एकड़ भूमि उपलब्ध है। इसी स्थान पर एम्स निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है।
जनप्रतिनिधियों ने पहले भी उठाई है आवाज
पूर्व में सांसद रहे संतोष गंगवार, वर्तमान सांसद छत्रपाल गंगवार, मीरगंज विधायक डॉ. डीसी वर्मा, कैंट विधायक संजीव अग्रवाल, बिथरी विधायक डॉ. राघवेंद्र शर्मा, पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप सहित कई जनप्रतिनिधि व्यक्तिगत मुलाकातों और पत्राचार के माध्यम से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से एम्स स्थापना की मांग कर चुके हैं।
बरेली के सांसद छत्रपाल गंगवार ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एम्स की स्थापना बरेली में कराने के लिए प्रयास और तेज किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि बरेली से दिल्ली या लखनऊ पहुंचने में चार से पांच घंटे लगते हैं, जबकि आगरा और मेरठ जैसे शहरों को पहले से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। सांसद ने संकेत दिया कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर पुनः चर्चा करेंगे।
संगठन स्तर पर भी तेज होगी पहल
भाजपा के बृज क्षेत्र अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य ने कहा कि बजट में एम्स का प्रावधान आने से बरेली में इसकी स्थापना को लेकर हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एम्स की सबसे मजबूत मांग बरेली से उठी है। जनप्रतिनिधियों से समन्वय कर उच्च स्तर पर इस मुद्दे को मजबूती से रखा जाएगा। एम्स बनने से हजारों लोगों को इलाज के लिए दिल्ली और लखनऊ की दौड़ से राहत मिलेगी।
ट्रॉमा सेंटर का मुद्दा भी फिर चर्चा में
केंद्रीय बजट में हर जिले में ट्रॉमा सेंटर बनाए जाने का प्रावधान किया गया है। बरेली में पहले से ही ट्रॉमा सेंटर का भवन तैयार है, लेकिन स्टाफ की तैनाती न होने के कारण इसका संचालन नहीं हो सका। नए बजटीय प्रावधान के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि पहले से बने ट्रॉमा सेंटर में आवश्यक मैनपावर की तैनाती हो सकती है, जिससे यह सुविधा शुरू हो सके।






