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बिहार में ‘उल्टी गंगा’ की तैयारी, 1623 करोड़ की योजना से बदलेगी खेती की तस्वीर

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खेती और सिंचाई की तस्वीर बदलने वाली एक ऐतिहासिक योजना अब जमीन पर उतरती दिखाई देने लगी है। वर्षों से उत्तर दिशा की ओर बहकर गंगा में मिलने वाली बदुआ, चांदन, चीर और सुखनियां जैसी नदियों के क्षेत्र में अब ‘उल्टी गंगा’ बहाने की तैयारी की जा रही है। इस पहल से इन इलाकों में जल संकट दूर होने और कृषि उत्पादन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी गंगा जल आपूर्ति परियोजना के तहत गंगा का पवित्र जल सीधे बदुआ डैम तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए बड़े पैमाने पर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है, ताकि सालभर डैमों में पर्याप्त जल उपलब्ध रह सके।

1623 करोड़ से अधिक की परियोजना, विशाल पाइपलाइन नेटवर्क

करीब 1623 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली इस योजना के अंतर्गत विशाल पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया जा रहा है। इसके माध्यम से गंगाजल को डैमों और जलाशयों तक पहुंचाया जाएगा। परियोजना के पूरा होने के बाद डैम सालभर भरे रहेंगे, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी की कमी से राहत मिलेगी।

बदुआ-हनुमाना जलाशय तक गंगाजल पहुंचाने का काम तेज

परियोजना के तहत बदुआ-हनुमाना जलाशय तक गंगाजल पहुंचाने का कार्य तेज़ी से जारी है। अधिकारियों के अनुसार, यदि कार्य इसी रफ्तार से चलता रहा तो वर्ष 2026 के अंत तक गंगा का जल डैम तक पहुंचने की संभावना है। इससे क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा।

बिज्जीखरबा सिंचाई कालनी में टैंक निर्माण अंतिम चरण में

इस योजना के अंतर्गत बिज्जीखरबा सिंचाई कालनी में जल भंडारण के लिए बनाए जा रहे टैंक का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है। टैंक की खोदाई लगभग पूरी हो चुकी है और अब ढलाई कार्य शुरू किया जाने वाला है।
इसके साथ ही लिफ्ट निर्माण कार्य भी आरंभ कर दिया गया है। लिफ्ट के संचालन और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं के लिए आवश्यक भवन निर्माण प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने वाली है।

गंगा जल आपूर्ति परियोजना के पूरा होने के बाद यह क्षेत्र न केवल सिंचाई के लिहाज से आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि इससे कृषि उत्पादन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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