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बरेली बवाल: अवैध हथियार सप्लाई का खुलासा

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बरेली (उत्तर प्रदेश) में पिछले साल 26 सितंबर को हुए हिंसक बवाल को लेकर पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। मामले में अब यह सामने आया है कि उपद्रव से पहले आरोपियों को अवैध हथियारों की सप्लाई की गई थी। इस कड़ी में पुलिस ने दो शातिर सप्लायरों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

पुलिस के मुताबिक, बहेड़ी थाना क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को पकड़ा गया है, जो बवाल में शामिल लोगों तक अवैध हथियार पहुंचाने का काम करते थे।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

बृहस्पतिवार को आयोजित प्रेसवार्ता में एसपी उत्तरी मुकेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बहेड़ी निवासी तसलीम और शेरगढ़ निवासी सोमू खान उर्फ औसाफ के रूप में हुई है। दोनों लंबे समय से अवैध हथियारों की सप्लाई में सक्रिय थे।

मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने शेरगढ़ अड्डे पर घेराबंदी कर दोनों को दबोच लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कई अहम खुलासे किए हैं, जिससे बवाल की साजिश और नेटवर्क का पता चल रहा है।

हिस्ट्रीशीटर से जुड़े तार

जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपियों की करीबी दोस्ती हिस्ट्रीशीटर इशरत अली से थी। पुलिस को शक है कि यह पूरा नेटवर्क उसी के इशारे पर संचालित हो रहा था।

बरामद की गई स्विफ्ट कार भी इशरत अली की बताई जा रही है, जिसका इस्तेमाल अवैध हथियारों की सप्लाई के लिए किया जाता था। यह कार बवाल से पहले अलग-अलग स्थानों पर हथियार पहुंचाने में इस्तेमाल हुई थी।

भारी मात्रा में हथियार बरामद

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में अवैध हथियार और अन्य सामान बरामद किया है, जिसमें शामिल हैं:

  • पांच अवैध .32 बोर पिस्टल

  • 36 जिंदा कारतूस

  • दो तमंचे

  • एक स्विफ्ट कार

  • दो मोबाइल फोन

यह बरामदगी इस बात की पुष्टि करती है कि बवाल के पीछे सुनियोजित तरीके से हथियारों की सप्लाई की गई थी।

मोबाइल से मिले अहम सबूत

जांच के दौरान पुलिस ने जब आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की, तो उसमें बवाल से जुड़े कई वीडियो और फोटो मिले।

एक वीडियो में गिरोह का सरगना इशरत अली अवैध पिस्टल से टेस्ट फायर करता हुआ नजर आया। यह वीडियो पुलिस के लिए अहम सबूत माना जा रहा है।

बवाल के दिन की सप्लाई

पूछताछ में सोमू खान ने कबूल किया कि 26 सितंबर को हुए बवाल के दौरान उसने झुमका तिराहा पर बड़ी मात्रा में पिस्टल और कारतूस पहुंचाए थे।

इतना ही नहीं, गिरोह के सदस्य वीडियो कॉल के जरिए हथियारों की सप्लाई की पुष्टि करते थे, ताकि हर डिलीवरी सुरक्षित तरीके से पूरी हो सके।

संगठित नेटवर्क का खुलासा

पुलिस का मानना है कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा है, जिसमें पहले से प्लानिंग कर हथियार जुटाए गए और फिर उपद्रवियों तक पहुंचाए गए।

अब पुलिस इस पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है और हिस्ट्रीशीटर इशरत अली की भूमिका की भी गहराई से जांच की जा रही है।

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