ईद पर काले कपड़े न पहनें, विरोध से बचें: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी

उत्तर प्रदेश में ईद से पहले एक अहम अपील सामने आई है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मुसलमानों से ईद के दिन काले कपड़े पहनने और किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ईद का दिन खुशी, इबादत और भाईचारे का प्रतीक है, इसलिए इसे किसी भी राजनीतिक संदेश या विरोध के माध्यम में बदलना उचित नहीं है।
मौलाना रजवी ने कहा कि रमजान का पूरा महीना मुसलमान अल्लाह की इबादत में बिताते हैं। इस पवित्र महीने के समापन के बाद ईद का दिन आता है, जो खुशियां मनाने और एक-दूसरे को मुबारकबाद देने का अवसर होता है। ऐसे में किसी के बहकावे में आकर इस दिन को गम या विरोध का प्रतीक बनाना ठीक नहीं है।
आजम खान के संदेश पर दी प्रतिक्रिया
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान से जुड़े एक संदेश पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि आजम खान इस समय जेल में बंद हैं और उनसे मिलने के लिए मुरादाबाद के सपा नेता यूसुफ मलिक गए थे। बताया गया कि आजम खान ने यूसुफ मलिक के माध्यम से मुसलमानों तक यह संदेश पहुंचाने की बात कही कि ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए ईद के दिन मुसलमान काले कपड़े पहनें, हाथों में काली पट्टी बांधें और नमाज के बाद विरोध प्रदर्शन करें।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना रजवी ने कहा कि किसी भी राजनीतिक व्यक्ति के कहने पर धार्मिक पर्व को विरोध के मंच में बदलना उचित नहीं है। उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे ऐसे किसी भी संदेश या उकसावे में न आएं। उन्होंने कहा कि ईद का दिन खुशी और इबादत के लिए होता है, इसलिए इसे उसी रूप में मनाया जाना चाहिए।
मौलाना ने यह भी कहा कि मुसलमानों को दुनिया में अमन और शांति के लिए दुआ करनी चाहिए और किसी भी तरह की नकारात्मक गतिविधि से दूर रहना चाहिए।
सड़क पर नमाज न पढ़ने की भी अपील
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने ईद के दिन सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करने से भी बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि ईद के मौके पर नमाज पढ़ने वालों की संख्या बहुत ज्यादा होती है। बड़े शहरों में ईदगाहों में पर्याप्त जगह होती है, जहां एक साथ बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा कर लेते हैं। लेकिन कई मोहल्लों में मस्जिदें छोटी होती हैं, जिसके कारण सभी लोग एक साथ नमाज नहीं पढ़ पाते और मजबूरी में कुछ लोग सड़क या गलियों में नमाज पढ़ने लगते हैं।
उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति के लिए शरीयत में पहले से व्यवस्था मौजूद है। मस्जिदों के इमाम जरूरत के अनुसार अलग-अलग समय पर एक से अधिक जमात करवा सकते हैं। यानी नमाज एक बार में पूरी न हो पाए तो दूसरी, तीसरी या चौथी जमात भी कराई जा सकती है।
मौलाना ने मस्जिदों के इमामों से भी अपील की कि अगर नमाजियों की संख्या अधिक हो तो वे अलग-अलग समय पर जमात कराने की व्यवस्था करें, ताकि किसी को सड़क या सार्वजनिक स्थान पर नमाज पढ़ने की जरूरत न पड़े और सभी लोग आसानी से अपनी नमाज अदा कर सकें।
सरकार की गाइडलाइन का पालन करने की सलाह
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने देशवासियों को ईद की मुबारकबाद देते हुए कहा कि सभी लोग नमाज और इबादत का पूरा एहतमाम करें। साथ ही प्रशासन और सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का भी पालन करें, ताकि त्योहार शांति और सौहार्द के माहौल में मनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि ईद का संदेश आपसी भाईचारे, प्रेम और सद्भाव का है। इसलिए जरूरी है कि इस दिन किसी भी तरह का विवाद या तनाव पैदा करने वाली गतिविधियों से बचा जाए।






