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उत्तरप्रदेश

बरेली राहुल हत्याकांड में दो दोषियों को उम्रकैद, अवैध संबंध के शक में की थी हत्या

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उत्तर प्रदेश के बरेली में चर्चित राहुल हत्याकांड में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) रामानंद की अदालत ने मुख्य आरोपी चेतराम और उसके साथी मुनीश उर्फ लाखन को हत्या, अपहरण और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराया।

अदालत ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास के साथ 1 लाख 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, साक्ष्य के अभाव में चेतराम की पत्नी शारदा को आरोपों से बरी कर दिया गया।

पत्नी से अवैध संबंध के शक में रची गई साजिश

मामले के अनुसार, चेतराम को शक था कि राहुल का उसकी पत्नी शारदा के साथ अवैध संबंध है। इसी शक के चलते उसने अपने साथी मुनीश उर्फ लाखन के साथ मिलकर राहुल की हत्या की साजिश रची।

घटना 6 जून 2015 की रात की है। उस दिन राहुल घर पर खाना खाने के बाद बाहर निकले थे, लेकिन फिर वापस नहीं लौटे। अगले दिन सुबह राहुल की चप्पलें और मोबाइल फोन के दो सिम कार्ड बरामद हुए, जिसके बाद परिजनों ने उनकी गुमशुदगी और संदिग्ध परिस्थितियों को लेकर पुलिस को सूचना दी।

कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर किया बेहोश

पुलिस जांच में सामने आया कि चेतराम और उसके साथी मुनीश ने राहुल को बहाने से अपने साथ मोटरसाइकिल पर बैठा लिया। उन्होंने राहुल से कहा कि वह उनके साथ चलकर उसके भाई को खाना दे आए।

रास्ते में आरोपियों ने राहुल को कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया, जिससे वह बेहोश हो गया। इसके बाद दोनों आरोपियों ने उसे बहगुल नदी के पुल तक ले जाकर तार से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।

हत्या के बाद शव नदी में फेंका

हत्या करने के बाद आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने की कोशिश की। उन्होंने राहुल के शव को बहगुल नदी में फेंक दिया ताकि मामला दुर्घटना या लापता होने जैसा लगे।

हालांकि, पुलिस की विवेचना के दौरान चेतराम, उसके दोस्त मुनीश और उसकी पत्नी शारदा का नाम सामने आया। जांच और साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए।

कोर्ट का फैसला: दो दोषियों को उम्रकैद

लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने मुख्य आरोपी चेतराम और मुनीश उर्फ लाखन को हत्या, अपहरण और साक्ष्य मिटाने का दोषी पाया। कोर्ट ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई और आर्थिक दंड भी लगाया।

वहीं, चेतराम की पत्नी शारदा के खिलाफ पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण अदालत ने उसे आरोपों से मुक्त कर दिया।

इस फैसले के साथ करीब एक दशक पुराने इस हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा हो गया।

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