सटीक इलाज की नई दिशा: रेडिएशन थेरेपी अब कैंसर पर, मरीज पर नहीं
बरेली। रेडिएशन थेरेपी को लेकर वर्षों से बनी आशंका अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है। आधुनिक मेडिकल टेक्नोलॉजी ने रेडिएशन इलाज को इतना सटीक और सुरक्षित बना दिया है कि इसका प्रभाव अब केवल कैंसर कोशिकाओं तक सीमित रह गया है। मरीज के स्वस्थ अंगों को अधिकतम सुरक्षा देते हुए कैंसर पर सीधा प्रहार ही आज की रेडिएशन थेरेपी का मूल उद्देश्य है।
अब शार्पशूटर की तरह करता है काम रेडिएशन
आज की रेडिएशन थेरेपी को शार्पशूटर की तरह देखा जा सकता है, जो बिना भटके लक्ष्य पर वार करता है। एडवांस्ड इमेजिंग सिस्टम, कंप्यूटर-आधारित ट्रीटमेंट प्लानिंग और हाई-प्रिसिजन मशीनों के माध्यम से रेडिएशन की खुराक को ट्यूमर के आकार, गहराई और स्थिति के अनुसार तय किया जाता है। इससे आसपास के स्वस्थ टिशू काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं।
कैंसर कोशिकाएं होती हैं निष्क्रिय
रेडिएशन थेरेपी में हाई-एनर्जी किरणों या कणों का उपयोग कर कैंसर कोशिकाओं की डीएनए संरचना को नुकसान पहुंचाया जाता है, जिससे वे आगे विभाजित नहीं हो पातीं। जहां कुछ स्वस्थ कोशिकाएं अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती हैं, वहीं वे कैंसर कोशिकाओं की तुलना में कहीं तेजी से रिकवर कर लेती हैं।
संयुक्त इलाज का अहम हिस्सा
कैंसर के प्रकार और उसकी स्टेज के अनुसार रेडिएशन थेरेपी को अकेले या सर्जरी, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी के साथ मिलाकर दिया जाता है। इससे इलाज की सफलता दर बढ़ती है और मरीज की रिकवरी बेहतर होती है।
विशेषज्ञ की राय
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. मनीष भूषण पांडे बताते हैं“पहले रेडिएशन थेरेपी में चौड़ी बीम का इस्तेमाल होता था, जिससे स्वस्थ टिशू भी प्रभावित होते थे। अब आईएमआरटी (IMRT) और आईजीआरटी (IGRT) जैसी तकनीकों ने इलाज को पूरी तरह बदल दिया है। ये तकनीकें ट्यूमर के 3-डी आकार के अनुसार रेडिएशन की खुराक तय करती हैं और हर सत्र में रियल-टाइम इमेजिंग से बीम को सटीक दिशा देती हैं।”






