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UP कैबिनेट: ग्रेटर नोएडा लॉजिस्टिक्स पार्क और प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल शेड योजना को मंजूरी

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उत्तर प्रदेश सरकार ने औद्योगिक विकास और लॉजिस्टिक्स क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ग्रेटर नोएडा में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP) और प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल शेड्स योजना को मंजूरी दी गई है।

लॉजिस्टिक्स पार्क को मिली अंतिम मंजूरी

इस परियोजना से जुड़े नियम और शर्तों को 9 फरवरी 2026 को उच्च स्तरीय समिति ने मंजूरी दी थी, जिसका कार्यवृत्त 6 मार्च को जारी किया गया। इसके बाद औद्योगिक विकास विभाग और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की सिफारिशों के आधार पर प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा गया, जिसे स्वीकृति मिल गई।

सरकार के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा में बनने वाला यह मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में माल परिवहन को अधिक कुशल बनाएगा। इससे वेयरहाउसिंग, कोल्ड-चेन और सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार होगा, जिससे उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी और कम लागत पर लॉजिस्टिक्स सुविधा मिलेगी।

सरकार का लक्ष्य इस नीति के माध्यम से उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब बनाना है, जिससे निर्यात गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।


DBFOT मॉडल पर बनेंगे इंडस्ट्रियल शेड्स

कैबिनेट ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के तहत DBFOT (Design, Build, Finance, Operate, Transfer) मॉडल पर प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल शेड्स विकसित करने की योजना को भी मंजूरी दी है।

इस योजना का उद्देश्य उद्योगों को तैयार अवसंरचना उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें जमीन लेने के बाद निर्माण में समय और लागत खर्च न करनी पड़े। मौजूदा “लीज एंड बिल्ड” मॉडल में उद्योगों को उत्पादन शुरू करने में 18 से 36 महीने तक लग जाते हैं, जिसे नई योजना के जरिए काफी कम किया जाएगा।


MSME और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा फायदा

नई योजना के तहत विकसित औद्योगिक शेड्स में मेटल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी कंपोनेंट्स, ऑटो सहायक उद्योग, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और डिफेंस एयरोस्पेस जैसे सेक्टरों को प्राथमिकता दी जाएगी।

इससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) को जल्दी उत्पादन शुरू करने का अवसर मिलेगा और प्रदेश में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों को गति मिलेगी।


भूमि, निवेश और समयसीमा तय

योजना के तहत न्यूनतम 10 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है, जबकि पायलट प्रोजेक्ट के लिए 15 से 20 एकड़ भूमि को प्राथमिकता दी जाएगी। कन्सेशन अवधि 45 वर्ष तय की गई है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर 15 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

परियोजना पूरी होने के बाद सभी परिसंपत्तियां औद्योगिक विकास प्राधिकरण को हस्तांतरित कर दी जाएंगी, जबकि भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा।


राजकोष पर नहीं पड़ेगा बोझ

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस योजना के तहत किसी प्रकार की बजटीय सहायता, VGF (Viability Gap Funding) या सरकारी गारंटी नहीं दी जाएगी। पूरी परियोजना वित्तीय अनुशासन के तहत तैयार की गई है।

राजस्व मॉडल के तहत औद्योगिक विकास प्राधिकरण को एकमुश्त प्रीमियम, वार्षिक शुल्क और रेवेन्यू शेयर के जरिए आय प्राप्त होगी। साथ ही न्यूनतम विकास दायित्व (MDO) तय किए गए हैं, ताकि भूमि का दुरुपयोग या होर्डिंग न हो सके।


निष्कर्ष

यूपी सरकार के ये फैसले राज्य को औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। लॉजिस्टिक्स पार्क और प्लग-एंड-प्ले शेड्स जैसी योजनाएं निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को नई रफ्तार देने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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