बरेली में सरकारी जमीन पर अवैध मदरसा और प्लाटिंग का आरोप, गांव उडला जागीर में छिड़ी सियासी जंग
तहसील सदर के ग्राम उडला जागीर में सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे को लेकर सियासी और ग्रामीण विवाद गहराता जा रहा है। गांव में तालाब और ग्राम समाज की जमीन पर मदरसा, मस्जिद निर्माण एवं अवैध प्लाटिंग के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मामला पंचायत चुनाव की सरगर्मियों के बीच और ज्यादा चर्चा में आ गया है।

बरेली। तहसील सदर के ग्राम उडला जागीर में सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे को लेकर सियासी और ग्रामीण विवाद गहराता जा रहा है। गांव में तालाब और ग्राम समाज की जमीन पर मदरसा, मस्जिद निर्माण एवं अवैध प्लाटिंग के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मामला पंचायत चुनाव की सरगर्मियों के बीच और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
ग्रामीणों के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार गांव के दो प्रधान पक्ष आमने-सामने हैं और एक-दूसरे पर सरकारी भूमि कब्जाने के आरोप लगा रहे हैं। एक पक्ष का आरोप है कि सरकारी जमीन पर मदरसा और मस्जिद का निर्माण कराया गया, जबकि दूसरे पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि संबंधित भूमि तालाब की है और सरकारी जमीन पर निर्माण कराया गया है। वहीं दूसरे पक्ष ने आरोप लगाया कि पूर्व कार्यकाल में ग्राम समाज की जमीन बेचकर अवैध प्लाटिंग कराई गई।
गांव में तालाब की भूमि और ग्राम समाज की जमीन को लेकर चल रही चर्चाओं ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो स्पष्ट हो जाएगा कि मदरसा और अन्य निर्माण तालाब की भूमि पर हैं या नहीं, तथा ग्राम समाज की भूमि पर अवैध प्लाटिंग किसके संरक्षण में की जा रही है।
हालांकि इस पूरे मामले में मौजूदा ग्राम प्रधान मुशाहिद अली ने खुद को विवाद से अलग बताते हुए कहा कि उन्हें इस प्रकरण की कोई जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि, “मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं था, इसलिए मैं आज नमाज के लिए भी नहीं गया। मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है।”
हालांकि अभी तक इस मामले में प्रशासन के समक्ष कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, लेकिन गांव में यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन द्वारा लगातार अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के बावजूद सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक यदि प्रशासनिक अधिकारी मौके पर जांच करते हैं तो कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। माना जा रहा है कि योगी सरकार की अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त नीति के चलते आने वाले दिनों में इस मामले में भी कार्रवाई संभव है।
फिलहाल गांव में तालाब की जमीन, ग्राम समाज की भूमि और पंचायत राजनीति को लेकर माहौल गर्म है तथा लोग प्रशासनिक जांच का इंतजार कर रहे हैं।






