UP News: तीसरी बेटी को निसंतान दंपती को सौंपा, फिर अपहरण की झूठी कहानी; CCTV से खुला पूरा सच
उत्तर प्रदेश के बरेली में तीसरी बेटी के जन्म के बाद दंपती ने उसे निसंतान दंपती को सौंप दिया और बाद में अपहरण की झूठी कहानी गढ़ दी। पुलिस जांच और CCTV फुटेज से पूरा मामला उजागर हुआ।

बरेली, उत्तर प्रदेश:
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 21 दिन की नवजात बच्ची के कथित अपहरण की कहानी महज एक साजिश निकली। पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर खुलासा हुआ कि बच्ची का अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि उसके माता-पिता ने ही उसे एक निसंतान दंपती को सौंप दिया था और बाद में समाज के दबाव से बचने के लिए झूठी कहानी गढ़ दी।
अपहरण की शिकायत से मचा हड़कंप
इज्जतनगर थाना क्षेत्र के परतापुर चौधरी गांव निवासी मकसूद ने शुक्रवार रात करीब 11 बजे पुलिस को तहरीर देकर बताया कि वह अपनी पत्नी शबाना और 21 दिन की बच्ची के साथ जिला अस्पताल आया था। उसके मुताबिक, पत्नी को दवा दिलाने के लिए अस्पताल में छोड़कर वह जन्म प्रमाणपत्र बनवाने चला गया था।
मकसूद का दावा था कि जब वह वापस लौटा तो उसकी पत्नी वहां नहीं मिली। काफी तलाश के बाद शाम करीब साढ़े पांच बजे पत्नी अस्पताल परिसर में बेहोश हालत में मिली, जबकि नवजात बच्ची गायब थी। उसने आरोप लगाया कि किसी गिरोह ने उसकी पत्नी को नशीला पदार्थ देकर बच्ची का अपहरण कर लिया।
पुलिस जांच में सामने आया सच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, लेकिन जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया।
फुटेज में कहीं भी मकसूद, उसकी पत्नी या बच्ची के अस्पताल आने का कोई प्रमाण नहीं मिला। इससे पुलिस को कहानी पर संदेह हुआ और दंपती से सख्ती से पूछताछ की गई।
कबूलनामे ने पलटा पूरा मामला
पुलिस पूछताछ में दंपती ने सच्चाई कबूल कर ली। उन्होंने बताया कि तीसरी बेटी होने के कारण आर्थिक तंगी और पारिवारिक दबाव के चलते उन्होंने बच्ची को बहेड़ी क्षेत्र के शेखूपुर गांव निवासी शबावी नाम की महिला को सौंप दिया था।
दरअसल, शबाना और शबावी की मुलाकात करीब दो साल पहले जिला अस्पताल में हुई थी, जहां दोनों के बीच दोस्ती हो गई थी। शबावी के पति तस्लीम 2018 से दिव्यांग हैं और दंपती निसंतान है। ऐसे में उन्होंने बच्चा गोद लेने की इच्छा जताई थी।
समाज के दबाव में रचा गया ड्रामा
मकसूद ने पुलिस को बताया कि वह पत्नी के साथ बच्ची को देने के बहाने घर से निकले और बहेड़ी जाकर नवजात को शबावी को सौंप दिया।
जब वे रात में घर लौटे तो परिवार और रिश्तेदारों ने बच्ची के बारे में सवाल पूछने शुरू कर दिए। इसी दबाव में आकर उन्होंने जिला अस्पताल से बच्ची के अपहरण की झूठी कहानी गढ़ दी।
पुलिस की कार्रवाई और काउंसिलिंग
पुलिस ने बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया है। अब इस पूरे मामले में दंपती के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। पुलिस अदालत में रिपोर्ट पेश करेगी और साथ ही दंपती की काउंसिलिंग भी कराई जाएगी।
यह मामला न केवल कानून व्यवस्था बल्कि समाज में बेटियों को लेकर मौजूद मानसिकता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
#BareillyNews #UPCrime #FakeKidnappingCase #GirlChildIssue #CCTVRevealed #BreakingNews #UttarPradesh






