बरेली: एयरफोर्स रेड जोन में कॉलोनी, BDA की आपत्ति से फंसी बिल्डर की योजना

शहर में बिल्डरों की मनमानी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ओरिका होम बिल्डर द्वारा एयरफोर्स के रेड जोन में कॉलोनी विकसित करने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।
बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि बिना एयरफोर्स की एनओसी (No Objection Certificate) के इस योजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
रेड जोन में विकसित की गई कॉलोनी
मामला मुड़िया अहमद नगर क्षेत्र का है, जहां बिल्डर ने एयरफोर्स और बीडीए के नियमों को दरकिनार करते हुए आवासीय योजना विकसित कर दी। बताया जा रहा है कि यह इलाका एयरफोर्स के फ्लाइंग ज़ोन की रेड कैटेगरी में आता है, जहां निर्माण कार्य के लिए विशेष अनुमति आवश्यक होती है।
इसके बावजूद बिल्डर ने न केवल भूखंड विकसित किए, बल्कि उनकी बिक्री की तैयारी भी शुरू कर दी।
बिना NOC के कंप्लीशन का आवेदन
चौंकाने वाली बात यह है कि बिल्डर ने एयरफोर्स से एनओसी लिए बिना ही बीडीए में योजना के कंप्लीशन के लिए आवेदन भी कर दिया।
इस पर आपत्ति जताते हुए बरेली विकास प्राधिकरण ने साफ निर्देश दिया है कि पहले एयरफोर्स से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया जाए, तभी आगे की प्रक्रिया संभव होगी।
आमजन के साथ धोखे की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि रेड जोन में विकसित कॉलोनी में प्लॉट खरीदने वाले लोगों को भविष्य में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
- मानचित्र पास कराने में दिक्कत
- निर्माण पर प्रतिबंध
- कानूनी विवाद की संभावना
इससे यह मामला आमजन के साथ संभावित धोखाधड़ी से भी जुड़ता नजर आ रहा है।
BDA का सख्त रुख
बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. मनिकंडन ए. के. ने स्पष्ट कहा कि यह योजना नियमों के विपरीत विकसित की गई है। एयरफोर्स से एनओसी लिए बिना किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने बिल्डर को चेतावनी देते हुए कहा कि नियमों का पालन किए बिना आगे कोई कार्रवाई नहीं होगी।
पीलीभीत कनेक्शन की भी जांच
इस मामले में एक और बड़ा एंगल सामने आया है। पीलीभीत के डीआईओएस कार्यालय से जुड़े एक चपरासी द्वारा ओरिका बिल्डर के खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है।
बताया जा रहा है कि इस लेनदेन को लेकर पीलीभीत प्रशासन जांच कर रहा है और अवैध कमाई के इस्तेमाल की आशंका भी जताई जा रही है।
जांच तेज, योजना पर संकट
फिलहाल बीडीए की आपत्ति के बाद इस योजना पर संकट मंडरा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर जांच तेज कर दी गई है और आगे की कार्रवाई एयरफोर्स की रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।






