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बरेली

बहेड़ी में 28 करोड़ में नीलाम हुई केसर चीनी मिल की जमीन, किसानों को बकाया मिलने की बढ़ी उम्मीद

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बहेड़ी में 28 करोड़ में नीलाम हुई केसर चीनी मिल की जमीन, किसानों को बकाया मिलने की बढ़ी उम्मीद

बरेली। बहेड़ी क्षेत्र में बंद पड़ी केसर चीनी मिल की जमीन आखिरकार शनिवार को नीलाम हो गई। तहसील परिसर में हुई नीलामी में पांच निवेशकों ने हिस्सा लिया, लेकिन सबसे बड़ी बोली बरेली के आदेश पांडेय ने लगाई। उन्होंने 28 करोड़ 5 लाख रुपये की बोली के साथ करीब 7 करोड़ रुपये की जमानत राशि जमा कर दी। अब पूरी रकम जमा होने के बाद जमीन का हस्तांतरण किया जाएगा।

यह जमीन मुड़िया मुकर्रमपुर हाईवे किनारे स्थित है और लंबे समय से विवादों में रही है। केसर चीनी मिल पर क्षेत्र के गन्ना किसानों का करीब 147 करोड़ रुपये बकाया है। किसानों के भुगतान के लिए ही तहसील प्रशासन ने मिल की जमीन कुर्क कर नीलामी की प्रक्रिया शुरू की थी।

बताया गया कि इससे पहले सात बार नीलामी की कोशिश हुई, लेकिन कोई खरीदार सामने नहीं आया। शनिवार को आखिरकार नीलामी प्रक्रिया पूरी हो सकी। जमीन की सरकारी कीमत करीब 27 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

नीलामी एडीएम वित्त संतोष कुमार की निगरानी में हुई। प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। बोली में श्याम सुंदर ब्रदर्स रुद्रपुर, भूपेंद्र कुर्मी, आदेश पांडेय, एपी ब्रदर्स और पुष्कर राज शामिल हुए। शुरुआत में सभी प्रतिभागियों से 10 फीसदी राशि ड्राफ्ट के रूप में जमा कराई गई, उसके बाद बोली शुरू हुई।

अधिकारियों ने हर बोली में 10 लाख रुपये बढ़ाने की बात कही, लेकिन बोली लगाने वालों ने कम बढ़त से शुरुआत की। आखिर में सभी पीछे हट गए और आदेश पांडेय की 28.05 करोड़ रुपये की बोली सबसे ऊंची रही।

नीलामी के अंतिम समय में ब्लॉक प्रमुख मोहन सिंह चौहान 35 करोड़ रुपये का ड्राफ्ट लेकर पहुंचे और जमीन खरीदने की इच्छा जताई, लेकिन अधिकारियों ने समय निकल जाने की बात कहकर असमर्थता जता दी। इस पर मौके पर कुछ देर चर्चा भी हुई।

नीलामी के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। कुछ लोगों का कहना है कि जमीन की असली कीमत करीब 70 करोड़ रुपये है, लेकिन इसे बहुत कम कीमत पर बेच दिया गया। क्षेत्रीय लोगों ने मुख्यमंत्री और गन्ना मंत्री से मामले की जांच कराने की मांग की है।

हालांकि प्रशासन का कहना है कि नीलामी से मिलने वाली रकम किसानों के बकाया भुगतान में इस्तेमाल की जाएगी, जिससे लंबे समय से परेशान गन्ना किसानों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

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