उंगली टूटी शिक्षिका की, 17 महीने बाद जागा विभाग… अब कोर्ट का बहाना बनाकर झाड़े हाथ

उंगली टूटी शिक्षिका की, 17 महीने बाद जागा विभाग… अब कोर्ट का बहाना बनाकर झाड़े हाथ
महिला शिक्षिका को न्याय नहीं, अफसरों ने थमाया “मामला कोर्ट में है” का जवाब
बरेली। बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। क्यारा ब्लॉक की एक महिला शिक्षिका पिछले 17 महीनों से न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन विभागीय अफसर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सके। उल्टा अब मामला अदालत में पहुंचने के बाद अधिकारी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं।
मामला उच्च प्राथमिक विद्यालय क्यारा का है, जहां जनवरी 2025 में इंचार्ज शिक्षक प्रमोद कुमार पर अपनी सहकर्मी शिक्षिका सीमा शर्मा के साथ मारपीट और उनकी उंगली तोड़ने का आरोप लगा था। पीड़िता का कहना है कि आरोपी शिक्षक ने विवाद के दौरान उनकी रिंग फिंगर मरोड़ दी थी, जिससे गंभीर चोट आई।
पीड़िता ने पुलिस और शिक्षा विभाग दोनों से शिकायत की, लेकिन आरोप है कि कार्रवाई के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की गई। पुलिस ने मामले में एफआर लगा दी, जिसके बाद शिक्षिका को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
अब 17 महीने बाद क्यारा के खंड शिक्षा अधिकारी पूरन सिंह ने शिक्षिका को कार्यालय बुलाया। उम्मीद थी कि विभाग कोई सख्त कदम उठाएगा, लेकिन बीईओ ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए विभाग फिलहाल कुछ नहीं कर सकता।
पीड़िता का आरोप है कि उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन हर बार विभाग की ओर से ऐसी रिपोर्ट भेजी गई, जिसमें आरोपी शिक्षक को बचाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच के बजाय मामले को कमजोर करने का काम किया।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब एक महिला शिक्षिका न्याय के लिए दर-दर भटक रही थी, तब विभाग ने समय रहते कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। जिले की बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. विनीता स्वयं महिला अधिकारी हैं, इसके बावजूद पीड़िता को राहत नहीं मिल सकी।
स्थानीय लोगों और शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि विभाग शुरुआत में ही निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करता, तो मामला अदालत तक नहीं पहुंचता। अब आरोपी शिक्षक पर विभागीय कार्रवाई के बजाय “कोर्ट में मामला है” का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचा जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण ने मिशन शक्ति और महिला सुरक्षा के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।






