बरेली
यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी, पंचायत व्यवस्था पर बड़ा फैसला संभव

📍 लखनऊ/बरेली उत्तर प्रदेश सरकार ग्राम पंचायतों को लेकर एक अहम निर्णय की ओर बढ़ रही है। मौजूदा ग्राम प्रधानों का पांच साल का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक तैयारियों में देरी के चलते कार्यकाल विस्तार पर गंभीर विचार किया जा रहा है।
🔎 चुनावी प्रक्रिया में देरी
- पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन अभी तक नहीं हो पाया है।
- मतदाता सूची भी पूरी तरह तैयार नहीं है।
- समय पर पंचायत चुनाव कराना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण बन गया है।
⚖️ कानूनी ढांचे में होगा फैसला
पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि निर्णय पंचायती राज एक्ट के तहत ही लिया जाएगा। विभागीय स्तर पर मंथन जारी है और अंतिम फैसला न्यायालय के मार्गदर्शन के बाद होगा।
🏛️ संभावित विकल्प
यदि समय पर चुनाव नहीं हो पाते हैं तो दो विकल्प सामने आते हैं:
- प्रशासक नियुक्त करना – आमतौर पर एडीओ (पंचायत) को प्रशासक बनाया जाता है।
- प्रशासक समिति का गठन – प्रधान और पंचायत सदस्यों को शामिल कर समिति के माध्यम से संचालन।
इस बार संभावना है कि प्रशासक समिति को अधिक अधिकार दिए जाएं ताकि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बनी रहे।
📊 ग्राम स्तर पर असर
- कार्यकाल बढ़ने से वर्तमान प्रधानों को राहत मिलेगी और विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी।
- चुनाव टलने से राजनीतिक गतिविधियों में अस्थायी ठहराव आ सकता है।
- विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में देरी मान रहा है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक मजबूरी बता रही है।
👉 आने वाला फैसला पंचायत व्यवस्था की दिशा तय करेगा और पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर असर डालेगा।






