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उत्तराखण्ड

नाथ कॉरिडोर से बदलेगी बरेली की तस्वीर, योगी सरकार दे रही धार्मिक विरासत को नई पहचान

60 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं से होगा प्राचीन शिवालयों का कायाकल्प, आध्यात्मिक पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा रिपोर्ट देवेंद्र पटेल बरेली

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लखनऊ/बरेली, 12 मई। उत्तर प्रदेश में अयोध्या, काशी और मथुरा के बाद अब बरेली की प्राचीन नाथ परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में योगी सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में उत्तर प्रदेश सरकार ने “नाथ कॉरिडोर” परियोजना के तहत बरेली के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों के एकीकृत विकास का कार्य तेज कर दिया है। करीब 60 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए सनातन संस्कृति, अध्यात्म और धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देना है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार “विकास भी, विरासत भी” की सोच को धरातल पर उतारते हुए भगवान शिव और नाथ परंपरा से जुड़े पौराणिक स्थलों को संरक्षित एवं विकसित कर रही है। उन्होंने बताया कि नाथ कॉरिडोर के जरिए बरेली के ऐतिहासिक मंदिरों और मठों को एक सूत्र में पिरोकर धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनाया जा रहा है।
धोपेश्वर, तपेश्वर और वनखंडी नाथ मंदिर का होगा भव्य विकास
नाथ कॉरिडोर के अंतर्गत बरेली के कई प्राचीन शिवालयों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। सदर कैंट स्थित करीब 5000 वर्ष प्राचीन श्री धोपेश्वर नाथ मंदिर के विकास पर 7.74 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं जोगी नवादा स्थित द्वापरयुगीन वनखंडी नाथ मंदिर के पर्यटन विकास पर 5.82 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
इसके अलावा त्रिवटी नाथ मंदिर के विकास हेतु 6.55 करोड़ रुपये तथा तपेश्वर नाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के विस्तार पर 8.36 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं से श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक अनुभव मिलने के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
अलखनाथ मंदिर और तुलसी मठ को मिलेगा नया स्वरूप
करीब 930 वर्ष पुराने अलखनाथ मंदिर को भी नाथ कॉरिडोर के अंतर्गत भव्य रूप दिया जा रहा है। यहां 11.67 करोड़ रुपये की लागत से मुख्य द्वार, वैदिक लाइब्रेरी, यात्री सुविधाएं और अन्य विकास कार्य कराए जाएंगे।
पीलीभीत बाईपास स्थित श्री पशुपतिनाथ मंदिर का विकास लगभग 2.98 करोड़ रुपये से किया जा रहा है। वहीं नाथ परंपरा के महत्वपूर्ण स्थल श्री तुलसी मठ के विकास पर 9.71 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मढ़ीनाथ मंदिर को भी इस परियोजना में शामिल किया गया है।
इसके अतिरिक्त बरेली के 19 प्रमुख स्थलों पर करीब 4.97 करोड़ रुपये की लागत से आकर्षक फोकस वॉल का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे शहर की धार्मिक पहचान और अधिक मजबूत होगी।
कांवड़ यात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं
सावन मास में लाखों की संख्या में बरेली पहुंचने वाले कांवड़ यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी सरकार विशेष तैयारी कर रही है। करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से यात्री सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा।
परियोजना के अंतर्गत यात्री विश्राम गृह, सत्संग शेड, परिक्रमा मार्ग, प्रसाद एवं फ्लोरिस्ट शॉप, टॉयलेट ब्लॉक, एलईडी लाइटिंग, सौंदर्यीकरण और लैंडस्केपिंग जैसे कार्य कराए जा रहे हैं। इससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुव्यवस्थित धार्मिक वातावरण उपलब्ध होगा।
नाथ कॉरिडोर बनेगा आस्था और पर्यटन का संगम
नाथ कॉरिडोर केवल एक पर्यटन परियोजना नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और नाथ परंपरा की गौरवशाली विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। धोपेश्वर नाथ में ऋषि ध्रूम की तपस्या, वनखंडी नाथ की द्वापर युगीन मान्यताएं, त्रिवटीनाथ में भगवान शिव के दिव्य दर्शन, तपेश्वर नाथ की साधना स्थली और अलखनाथ में अलखिया बाबा की तपस्थली आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई हैं।
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। वर्ष 2025 में प्रदेश में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ, जबकि अकेले बरेली में 1.09 करोड़ से अधिक श्रद्धालु एवं पर्यटक पहुंचे। उन्होंने कहा कि नाथ कॉरिडोर का विकास धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगा और बरेली को आध्यात्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

 

रिपोर्ट देवेंद्र पटेल बरेली

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