बरेली जिला अस्पताल में बदइंतजामी की इंतहा: ठेली पर मरीज, टैंपो में लाश के बाद अब झुलसे युवक की तड़प ने खोली सिस्टम की पोल
80 फीसदी झुलसा युवक अस्पताल में फर्श पर तड़पता रहा, स्ट्रेचर तक नहीं मिला; जांच में स्टाफ की लापरवाही उजागर बरेली।

गरीब और जरूरतमंद मरीज जिस जिला अस्पताल को आखिरी उम्मीद मानते हैं, वहीं अब बदइंतजामी और लापरवाही की तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं। ठेली पर मरीज ले जाने और टैंपो में शव ढोने की घटनाओं की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि सोमवार को रेलवे यार्ड में करंट से झुलसे युवक की दर्दनाक हालत ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
रेलवे यार्ड में इलेक्ट्रिक करंट लगने से गंभीर रूप से झुलसे एक अज्ञात युवक को जीआरपी पुलिस जिला अस्पताल लेकर पहुंची थी। बताया जा रहा है कि युवक करीब 80 फीसदी तक झुलस चुका था और दर्द से लगातार चीख रहा था, लेकिन अस्पताल की इमरजेंसी में उसे समय पर स्ट्रेचर तक नहीं मिला। हालत यह रही कि युवक काफी देर तक टैंपो में ही तड़पता रहा और कोई कर्मचारी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक खुद ही टैंपो से उतरकर अस्पताल परिसर में इधर-उधर घूमता रहा और बाद में इमरजेंसी वार्ड के अंदर जाकर ठंडे फर्श पर लेट गया। जलन से बेहाल युवक आधे घंटे तक कराहता रहा, जबकि स्वास्थ्य कर्मी अन्य कार्यों में व्यस्त नजर आए। बाद में उसे जैसे-तैसे भर्ती कर बर्न वार्ड भेजा गया। उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
इस मामले में एडीएसआईसी डॉ. रमेश चंद्र दीक्षित ने सफाई देते हुए कहा कि युवक को जीआरपी पुलिस लेकर आई थी। अत्यधिक जलन होने के कारण वह खुद ठंडे फर्श पर लेट गया था। फिलहाल उसका बर्न वार्ड में इलाज चल रहा है।
ठेली पर मरीज ले जाने के मामले में जांच तेज
वहीं दूसरी ओर, जिला अस्पताल से महिला मरीज को ठेली पर ले जाने का मामला भी शासन तक पहुंच गया है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सोमवार को एडी हेल्थ डॉ. तेजपाल ने जिला अस्पताल पहुंचकर इमरजेंसी वार्ड के सीसीटीवी फुटेज, रजिस्टर और रिकॉर्ड की जांच की।
जांच में सामने आया कि सिंधु नगर निवासी अरहरि देवी को 9 मई की सुबह पीठ दर्द की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजन उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल लेकर आए थे। डॉक्टर द्वारा इलाज और दवाएं लिखे जाने के बाद महिला करीब पांच घंटे तक वार्ड में भर्ती रही। शाम करीब 4:25 बजे उसका पति बिना अस्पताल स्टाफ को जानकारी दिए ठेली पर बैठाकर उसे घर ले गया।
हालांकि शुरुआती जांच में चिकित्सकीय लापरवाही की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वार्ड सहायक और स्टाफ नर्स की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि अस्पताल स्टाफ सक्रिय रहता तो यह तस्वीर सामने नहीं आती।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
एडीएम एफआर संतोष सिंह ने जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए सिक्योरिटी गार्डों को फटकार लगाई। उन्होंने सवाल उठाया कि अस्पताल परिसर में ठेला कैसे पहुंच गया और किसी को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। डीएम अविनाश सिंह ने भी स्पष्ट कहा है कि यदि मामले में लापरवाही, साजिश या तथ्य छिपाने की कोशिश सामने आई तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
महिला अस्पताल के निरीक्षण में डॉक्टर और स्टाफ गायब
जिला अस्पताल प्रकरण के बाद प्रशासनिक टीम ने जिला महिला चिकित्सालय का भी औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आई। अपर जिलाधिकारी पूर्णिमा सिंह, एसडीएम न्यायिक निधि डोडवाल, एएसडीएम मल्लिका नैन समेत कई अधिकारियों की टीम को निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक त्रिभुवन प्रसाद ड्यूटी पर नहीं मिले।
ड्यूटी रोस्टर के अनुसार तैनात गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. शमी और डॉ. मीनाक्षी भी अनुपस्थित मिलीं। इसके अलावा कई नर्सिंग और पैरामेडिकल कर्मचारी भी ड्यूटी से गायब पाए गए। अल्ट्रासाउंड कक्ष में मरीजों से संबंधित कोई वैध रजिस्टर नहीं मिला, जबकि नोडल अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
मरीजों ने भी खोली अस्पताल की पोल
निरीक्षण के दौरान मरीजों ने भी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को लेकर शिकायतें दर्ज कराईं। मरीजों का आरोप था कि अल्ट्रासाउंड के लिए तीन-तीन महीने बाद की तारीख दी जा रही है, जबकि कई जांचें बाहर से कराने को मजबूर किया जा रहा है।
महिला मरीज तरनीम ने बताया कि अस्पताल में पैथोलॉजी जांच नहीं हो रही, जिसके कारण बाहर करीब 1700 रुपये खर्च करने पड़े। वहीं पूनम शुक्ला ने आरोप लगाया कि अस्पताल में जरूरी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं कराए गए और उन्हें बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ीं।
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि इमरजेंसी वार्ड के प्रवेश द्वार पर न तो स्ट्रेचर उपलब्ध था और न ही व्हीलचेयर। वार्ड सहायक और सुरक्षा गार्ड भी मौके से नदारद मिले। निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने अस्पताल प्रशासन को तत्काल व्यवस्थाएं सुधारने और लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।





