उत्तर प्रदेश का पहला निकाय बना बरेली नगर निगम, टैक्स सॉफ्टवेयर के खर्च के लिए निकाला अनोखा फॉर्मूला
बरेली नगर निगम ने संपत्तिकर व्यवस्था को मजबूत करने और करोड़ों रुपये की राजस्व प्रणाली को तकनीकी रूप से बेहतर बनाने के लिए एक अनोखी पहल की है।

नगर निगम ने टैक्स सॉफ्टवेयर के संचालन, रखरखाव और तकनीकी देखरेख पर हर वर्ष होने वाले करीब 50 लाख रुपये के खर्च को बचाने के लिए HDFC Bank के साथ करार किया है। इस व्यवस्था के तहत अब बैंक अपनी “आईटी सॉल्यूशन फैसिलिटेशन फॉर बिजनेस” योजना के माध्यम से हर साल यह खर्च वहन करेगा।
नगर निगम अधिकारियों का दावा है कि इस मॉडल को अपनाने वाला उत्तर प्रदेश का बरेली पहला नगर निकाय बन गया है। इससे निगम को टैक्स सिस्टम के संचालन में आर्थिक राहत मिलेगी, वहीं आमजन को ऑनलाइन कर सेवाओं में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
दरअसल, शहर में लगातार बदलते भवन स्वरूप और बड़ी संख्या में बने नए मकानों को जलकर, सीवर टैक्स और हाउस टैक्स से जोड़ने के लिए वर्ष 2019-20 में निगम ने Arhas Technology को जीआईएस सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी थी। यह एजेंसी प्रदेश के 11 जिलों में सर्वे कार्य कर रही है। वर्ष 2023-24 में सर्वे पूरा होने के बाद प्रॉपर्टी टैक्स मैनेजमेंट सिस्टम के संचालन को लेकर नई एजेंसी की आवश्यकता सामने आई।
नगर निगम ने व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए अरहस टेक्नोलॉजी से ही काम जारी रखने को कहा। एजेंसी ने सॉफ्टवेयर संचालन और तकनीकी देखरेख पर हर साल लगभग 50 लाख रुपये खर्च आने की बात कही। साथ ही यह भी बताया गया कि शासन स्तर से इस मद में भुगतान की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं हो सकी है।
आमजन को ऑनलाइन कर भुगतान और संपत्ति संबंधी सेवाओं में दिक्कत न आए, इसके लिए नगर आयुक्त ने मुख्य कर निर्धारण अधिकारी प्रमोद कुमार द्विवेदी को समाधान निकालने के निर्देश दिए। इसके बाद मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पी.के. द्विवेदी ने HDFC Bank से संवाद स्थापित कर इस खर्च का स्थायी समाधान निकाल लिया।
नगर निगम अधिकारियों का मानना है कि इस मॉडल से निगम की आर्थिक बचत के साथ-साथ टैक्स सिस्टम और डिजिटल सेवाओं की निरंतरता भी बनी रहेगी। आने वाले समय में दूसरे नगर निकाय भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।





