संतोष सबके लिए मिसाल: सांसद-मंत्री रहे, फिर भी नहीं छोड़ी टू-व्हीलर की सादगी

संतोष सबके लिए मिसाल: सांसद-मंत्री रहे, फिर भी नहीं छोड़ी टू-व्हीलर की सादगी
बरेली। दुनिया के कई हिस्सों में जारी युद्ध और वैश्विक तनाव के बीच ईंधन बचत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपील अब राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बनती जा रही है। बरेली की राजनीति में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा उदाहरण बनकर उभर रहा है—झारखंड के राज्यपाल और बरेली की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे संतोष गंगवार।
आठ बार सांसद रहने और केंद्र सरकार में कई अहम मंत्रालय संभालने के बावजूद संतोष गंगवार ने वर्षों तक अपनी सादगी नहीं छोड़ी। मंत्री और सांसद रहते हुए भी उन्हें अक्सर स्कूटी या बाइक से आम लोगों के बीच पहुंचते देखा गया। आज जब नेताओं के लंबे काफिले, लग्जरी गाड़ियां और वीआईपी संस्कृति आम चर्चा का हिस्सा हैं, तब संतोष गंगवार की वही पुरानी तस्वीरें राजनीतिक कार्यकर्ताओं और जनता के बीच मिसाल बनकर सामने आ रही हैं।
दरअसल, दुनिया में बढ़ते संघर्ष और तेल संकट की आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी लगातार ईंधन बचाने का संदेश दे रहे हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या राजनीति और सत्ता के बड़े चेहरे भी सार्वजनिक परिवहन और साधारण जीवनशैली को अपनाने के लिए आगे आएंगे?
राजनीति की मौजूदा तस्वीर देखें तो आमतौर पर नेता-अफसरों के काफिले, महंगी एसयूवी और सुरक्षा घेरों की चर्चा ज्यादा सुनाई देती है। सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने वाले चेहरे कम ही दिखाई देते हैं। मगर संतोष गंगवार इस परंपरा से अलग रहे। राज्यपाल बनने के बाद भले ही प्रोटोकॉल के कारण उनकी सादगी सड़क पर कम दिखाई देती हो, लेकिन बरेली की जनता आज भी उन्हें स्कूटी से गलियों और मोहल्लों में घूमते हुए याद करती है।
भाजपा नेताओं ने भी मानी प्रेरणा
भाजपा जिलाध्यक्ष आदेश प्रताप सिंह कहते हैं कि उन्होंने कुछ महीने पहले ई-बस से सफर किया था और वह बेवजह गाड़ियों का काफिला लेकर चलने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि पार्टी के कई पदाधिकारी आज भी बाइक से ही चलते हैं और यह प्रेरणा उन्हें संतोष गंगवार की सादगी से मिली है।
भाजपा महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना, जिन्होंने वर्षों तक टू-व्हीलर से राजनीति की यात्रा की, कहते हैं कि पार्टी स्तर पर जल्द ईंधन बचत को लेकर नई रूपरेखा तैयार की जाएगी। उनका मानना है कि जहां संभव हो, वहां कई गाड़ियों के बजाय एक ही वाहन का इस्तेमाल होना चाहिए।
विपक्ष ने भी गिनाए अपने अनुभव
बहेड़ी से सपा विधायक अताउर रहमान ने कहा कि वह हमेशा “साइकिल संस्कृति” से जुड़े रहे हैं और शहर में कई बार साइकिल से निकलते हैं। दिल्ली में वह निजी कार के बजाय मेट्रो को प्राथमिकता देते हैं।
सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव का कहना है कि वह अक्सर रोडवेज बस और ऑटो से सफर करते हैं, जबकि महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी ने कहा कि दिल्ली जैसे शहरों में वह बस से यात्रा करना पसंद करते हैं और बरेली में भी टेंपो से चलना ज्यादा सहज मानते हैं।
नई राजनीति और लग्जरी का बढ़ता शौक
हालांकि राजनीति के नए चेहरों की तस्वीर इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है। पंचायत चुनाव से लेकर जिला पंचायत और ब्लॉक प्रमुख की राजनीति तक, युवा नेताओं में महंगी एसयूवी और लग्जरी गाड़ियों का क्रेज तेजी से बढ़ा है।
बिथरी क्षेत्र में पिछले पंचायत चुनावों के दौरान कई युवा नेताओं ने चुनावी तैयारी के साथ अपनी पुरानी गाड़ियों को छोड़ फॉर्च्यूनर और स्कॉर्पियो जैसी महंगी गाड़ियां खरीद ली थीं। अब हालात ऐसे हैं कि ग्राम प्रधान से लेकर बड़े पदों तक, ज्यादातर जनप्रतिनिधि लग्जरी वाहनों के साथ ही नजर आते हैं।
ऐसे दौर में संतोष गंगवार की सादगी केवल एक पुरानी आदत नहीं, बल्कि राजनीति में जमीन से जुड़े रहने का संदेश भी बन चुकी है। शायद यही वजह है कि ईंधन बचाओ की बहस के बीच बरेली की जनता आज फिर उस पुराने नेता को याद कर रही है, जो सत्ता के शिखर पर पहुंचकर भी आम आदमी की तरह दो पहियों पर चलता रहा।
रिपोर्ट: देवेंद्र पटेल | LIVE BHARAT TV






