भूसे को लेकर विवादित जारी करने वाले खंड शिक्षा अधिकारी हटाए गए, नोटिस जारी

भूसे को लेकर विवादित जारी करने वाले खंड शिक्षा अधिकारी हटाए गए, नोटिस जारी
बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बीईआदेश ओ को कार्यालय से किया अटैच, मांगा स्पष्टीकरण
सभी अधिकारियों को संयमित भाषा में पत्राचार करने की नसीहत
बरेली, 29 मई।
नवाबगंज क्षेत्र में विद्यालयों से निराश्रित गोवंश के लिए भूसा एकत्र कराने संबंधी विवादित पत्र जारी होने के मामले में बेसिक शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सत्यदेव को जिला मुख्यालय से अटैच कर दिया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) विनीता ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब किया है। साथ ही जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को भविष्य में नियमसम्मत एवं संयमित भाषा में पत्राचार करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
विद्यालयों से भूसा एकत्र कराने संबंधी पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षक संगठनों और शिक्षकों ने इस पर आपत्ति जताई थी। मामला तूल पकड़ने के बाद विभाग ने विवादित आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लेते हुए इसकी समीक्षा शुरू कर दी। इसके बाद जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित बीईओ के खिलाफ कार्रवाई की गई।
स्वेच्छा से भूसा दान करने का था आग्रह
बीएसए विनीता ने स्पष्ट किया कि निराश्रित गोवंशीय पशुओं के लिए भूसा दान करने का आदेश पूर्णतः स्वेच्छा पर आधारित था और इसमें किसी प्रकार का दबाव नहीं था। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा गोवंश संरक्षण एवं जनकल्याण की है, जिसके तहत सभी वर्गों से सहयोग का आग्रह किया गया था।
उन्होंने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी सत्यदेव द्वारा जारी पत्र की भाषा एवं प्रस्तुति को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं, जिसके चलते उन्हें जिला मुख्यालय से संबद्ध किया गया है और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।
शिक्षकों ने कार्रवाई को बताया सकारात्मक कदम
शिक्षक संगठनों का कहना था कि शिक्षकों का मूल दायित्व विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है और उन्हें गैर-शैक्षिक कार्यों में अनावश्यक रूप से नहीं लगाया जाना चाहिए। विभाग द्वारा विवादित आदेश वापस लेने और त्वरित कार्रवाई किए जाने को शिक्षकों ने सकारात्मक कदम बताया है।
पूरे जिले के अधिकारियों को दिए गए निर्देश
शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई को केवल एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए जवाबदेही तय करने वाले निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। विभाग ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि भविष्य में किसी भी प्रकार का आदेश जारी करने से पहले उसकी आवश्यकता, वैधानिकता और भाषा का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
रिपोर्ट : देवेंद्र पटेल | LIVE BHARAT TV






