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बरेली

सरकारी खाद के गड्ढे पर 15 मकानों का निर्माण, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल

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सरकारी खाद के गड्ढे पर 15 मकानों का निर्माण, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल

ग्राम पंचायत मनेहरा में सरकारी भूमि पर कथित कब्जे का मामला बना चर्चा का विषय

बरेली। तहसील सदर क्षेत्र की ग्राम पंचायत मनेहरा, थाना भोजीपुरा में सरकारी खाद के गड्ढे (खाद भंडारण स्थल) की भूमि पर कथित रूप से लगभग 15 मकानों का निर्माण किए जाने का मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी सदर सहित संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि गांव में स्थित सरकारी खाद के गड्ढे की भूमि पर कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर निर्माण कार्य कराया गया है। उनका कहना है कि इस भूमि का उपयोग पूर्व में ग्राम पंचायत क्षेत्र के कूड़ा एवं खाद प्रबंधन के लिए किया जाता था, लेकिन वर्तमान में उस पर मकानों का निर्माण कर लिया गया है, जिससे गांव में कूड़ा निस्तारण की समस्या उत्पन्न हो रही है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि 25 जून को संबंधित अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रोका गया। उनका यह भी कहना है कि निर्माण कार्य ग्राम प्रधान के संरक्षण में कराया गया तथा तहसील स्तर पर शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम अधिकारी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह भूमि वास्तव में ग्राम समाज अथवा सरकारी अभिलेखों में खाद के गड्ढे के रूप में दर्ज है तो इसकी जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शिकायत प्राप्त होने पर मामले की जांच कराई जाएगी और राजस्व अभिलेखों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि तस्वीरों में दिखाई दे रहे निर्माण हाल ही में किए गए प्रतीत होते हैं, क्योंकि कई भवनों पर अभी प्लास्टर का कार्य भी नहीं हुआ है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि निर्माण कार्य लंबे समय से चल रहा था तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सरकारी भूमि, ग्राम समाज की जमीन, तालाब, चरागाह एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर अवैध कब्जों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। शासन की मंशा स्पष्ट है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में राजस्व अभिलेखों की जांच कर कथित अवैध निर्माणों पर प्रभावी कार्रवाई करता है या नहीं। यदि जांच में सरकारी भूमि पर कब्जे की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

(नोट: समाचार में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता एवं स्थानीय लोगों के कथनों पर आधारित हैं। मामले की सत्यता एवं वैधानिक स्थिति राजस्व अभिलेखों एवं प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।)

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