बरेली में बंदरों के आतंक से मिलेगी राहत, अब वन विभाग नहीं बल्कि नगर निगम पकड़ेगा उत्पाती बंदर
शहर में नगर निगम, ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतें करेंगी बंदरों को पकड़ने का काम

बरेली। शहर में उत्पाती बंदरों के बढ़ते आतंक से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश शासन ने शहरी क्षेत्रों में बंदरों को पकड़ने और उन्हें सुरक्षित वन क्षेत्रों में छोड़ने की जिम्मेदारी एक बार फिर नगर निगम को सौंप दी है। इस आदेश के साथ ही कई महीनों से वन विभाग और नगर निगम के बीच चल रही जिम्मेदारी को लेकर असमंजस की स्थिति समाप्त हो गई है।
शासनादेश प्राप्त होने के बाद नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने नगर निगम के पशु कल्याण विभाग को तत्काल एजेंसी चयन के लिए निविदा (टेंडर) जारी करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही शहर में विशेष अभियान चलाकर उत्पाती बंदरों को पकड़ने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि जनवरी 2026 से बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी को लेकर नगर निगम और वन विभाग के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। दोनों विभाग अलग-अलग शासनादेशों का हवाला देते हुए जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे थे। इसका परिणाम यह हुआ कि कई महीनों तक बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई प्रभावित रही और शहर के विभिन्न इलाकों में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता गया।
बरेली के कई वार्डों में बंदरों के झुंड बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और राहगीरों पर हमला करने की घटनाएं सामने आती रहीं। स्थानीय लोगों की लगातार शिकायतों और जनहित को देखते हुए शासन ने स्पष्ट आदेश जारी कर नगर निगम को पुनः जिम्मेदारी सौंप दी है।
नगर आयुक्त ने बताया कि पशु कल्याण विभाग को तत्काल निविदा प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। संभावना है कि अगस्त माह में ही एजेंसी का चयन होने के बाद शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में अभियान चलाकर बंदरों को सुरक्षित जंगलों में छोड़ा जाएगा।
वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों के नियंत्रण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपी गई है। प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) ने भी पुष्टि की है कि मुख्यालय से नए दिशा-निर्देश जारी होने के बाद विभागों के बीच बना भ्रम समाप्त हो गया है।
शहरवासियों को उम्मीद है कि जल्द शुरू होने वाला अभियान बंदरों के बढ़ते आतंक पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करेगा और आम लोगों को राहत मिलेगी।





