अस्पताल संचालक से 13 लाख की ठगी के साथ पुराने मुकदमों की बाढ़ कन्हैया गुलाटी पर अब तक 35 प्लस एफआईअर, परिवार सहित फरार

बरेली। कैनविज कंपनी के नाम पर चल रहे मल्टी-करोड़ ठगी के घोटाले में एक नया अध्याय जुड़ गया है। जहां श्री वीआर गुप्ता अस्पताल के संचालक मनोज कुमार गुप्ता ने अपनी पत्नी के साथ 13 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाते हुए एसएसपी से शिकायत की थी। जिसके बाद उनकी शिकायत पर थाना किला में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि कंपनी के एमडी कन्हैया गुलाटी और उनके सहयोगी ने उन्हें और उनकी पत्नी को झांसा देकर 13 लाख रुपये ठग लिए।
थाना किला क्षेत्र के किला छावनी निवासी मनोज कुमार गुप्ता ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले योगेंद्र गंगवार, यतेंद्र गंगवार और कुछ अज्ञात व्यक्ति उनके पास आए। उन्होंने खुद को कैनविज कंपनी के टॉप लीटर बताकर निवेश का लालच दिया। कहा गया कि कंपनी 20 महीनों में पैसा दोगुना कर देगी, 5 प्रतिशत मासिक ब्याज देगी और एडवांस चेक भी जारी करेगी। शुरू में मनोज ने मना किया, लेकिन आरोपियों ने कंपनी के चेयरमैन कन्हैया गुलाटी, उनके बेटे गोपाल गुलाटी और पत्नी राधिका गुलाटी का नाम लेकर विश्वास जीता। शिकायत के मुताबिक 30 अगस्त 2024 को मनोज ने एक लाख रुपये नकद दिए, जिसके बदले उन्हें आईडी और पासवर्ड मिला। बाद में उनकी पत्नी दुर्वेश गुप्ता के नाम पर 15 जनवरी 2025 को 2 लाख रुपये और 2 जुलाई 2025 को 10 लाख रुपये (पांच लाख एनईएफटी ओर पांच लाख चेक) निवेश कराए गए। कुल 13 लाख रुपये की रकम कंपनी के केकेएमएस एसोसिएट्स अकाउंट में गई। जब कंपनी और कन्हैया गुलाटी के भागने की खबरें आई, तो मनोज ने पैसे मांग, लेकिन आरोपियों ने अफवाह बताकर टाल दिया। व्याज भी महीनों से नहीं आ रहा था. और अब न पैसा लौटाया गया।
यह नया केस कन्हैया गुलाटी क खिलाफ पुरनी एफआईआर की लंबी कड़ी का हिस्सा है। पुलिस रिकॉर्डस और हालिया रिपोर्ट्स के मुताविक बारादरी और इज्जतनगर समेत अन्य थानों में 30 मुकदमें दर्ज हो चुके हैं।
देशभर में (झारखंड, बिहार, यूपी के अन्य जिलों सहित) कुल 35 से ज्यादा मुकमदें दर्ज हैं। जिसमें 800 करोड़ी क एक बड़ी एफआईआर भी शामिल है।
पुराने मामले 2016-18 से शुरू हुआ, जही एलआईसी का लोगो और नाम गलत इस्तेमाल कर निवेशकों को फंसाया गया। कपंनी ने शेयर मार्केट, फॉरेक्स ट्रेडिंग, रियल एस्टेट और एमएलएम स्कीम के नाम पर 20 लाख से ज्यादा लोगों से 3 हजार करोड़ रूपये तक की ठगी शामिल है।
एसआईटी (विशेष जांच दल) गठित है, लुकआउट नोटिस जारी, और गिरफ्तारी पर फोकस है। कन्हैया गुलाटी परिवार सहित फरार बताया जा रहा है।
पुराने मामलों की झलक (2023-2025 दर्ज कुछ प्रमुना एफआईआर) एलआईसी एजेंट से 1.35 करोड़ की ठगी (बरेली महिला पीड़िता)। एबुलेंस मालिक से 22 लाख और अन्य से 12-30 लाख की ठगी। 300 करोड़ की महाठगी बाराठी थाने में सबसे बड़ी एफआईआर) कई मामलों में बाउंस चेक, फजों प्लॉटिंग और विदेश भेजे गए फंड का आरोप
यह घोटाला अब इंटरस्टेट बन चुका है। पुलिस का कहना है कि पुराने मामालों में कुछ एफआर लगे थे, लेकिन 2025 में शिकायतों की बाद आई है। कन्हैया गुलाटी का नेटवर्क वरनी से शुरू होकर विहार, झारखंड, तक फैला। हजारों निवेशकों की जमा-पूंजी डूब गई, परिवार तबाह हो गए। अब देखना यह है कि पुलिस कन्हैया गुलाटी को पकड़ने में कामयाय होतो है। या फिर यही एफआईआर का सिलसिला जारी रहेगा।






