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उत्तरप्रदेशबरेली

1.90 करोड़ खर्च, फिर भी शहर में कुत्ते-बंदरों का आतंक जारी

बरेली नगर निगम के दावों के बावजूद लोग अब भी परेशान

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बरेली। नगर निगम ने पिछले साल तक आवारा कुत्तों और खूंखार बंदरों से शहरवासियों को निजात दिलाने के लिए 1.90 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने का दावा किया है। इस रकम से निगम ने 15,500 से अधिक कुत्तों को पकड़कर उनका बधियाकरण करवाया और 5,500 बंदरों को पकड़कर पीलीभीत के जंगल में छुड़वाया।

लेकिन सवाल यह है कि इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद शहरवासियों को कुत्तों और बंदरों से अभी तक राहत नहीं मिली है। आवारा कुत्ते गली-गली दौड़ रहे हैं, वहीं खूंखार बंदर छतों पर हमला कर लोगों को घायल कर रहे हैं।

बंदर पकड़ने के अभियान में भी दिख रही कमी

पिछले साल नगर निगम कार्यकारिणी समिति की बैठक में तय हुआ था कि हर वार्ड में बंदरों को पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा, लेकिन धरातल पर यह अभियान प्रभावी नहीं दिखा। हाल ही में बंदरों को पकड़ने का काम लगभग बंद है, जिससे सिकलापुर, राजेंद्र नगर, मॉडल टाउन, सुभाष नगर, नेकपुर और कुंवरपुर बंजरिया जैसे क्षेत्रों में लोग छतों पर बंदरों के हमलों से परेशान हैं।

आंकड़ों में विरोधाभास और खर्च का ब्योरा

अपर नगर आयुक्त शशिभूषण ने अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) को जानकारी दी थी कि नगर निगम क्षेत्र में सितंबर 2024 से 27 अगस्त 2025 तक 5,108 बंदर पकड़े गए। बंदर पकड़ने का काम मथुरा की मेसर्स इमरान कांट्रेक्टर ने किया और प्रति बंदर 717 रुपये खर्च हुए। इसी अवधि में कुल 36,62,436 रुपये खर्च किए गए।

कुत्तों के मामले में, 2018 से 31 जुलाई 2025 तक 15,296 कुत्तों को पकड़कर उनका बधियाकरण किया गया, प्रत्येक पर 917 रुपये खर्च हुए। कुल 1.40 करोड़ रुपये खर्च किए गए। कुत्तों का बधियाकरण ह्यूमन एंड एनिमल वेलफेयर संस्था ने किया।

वन विभाग और नगर निगम के आंकड़ों में अंतर

वन विभाग के अनुसार जिलेभर में तीन साल पहले 6,019 बंदर थे, जो घटकर 1,272 रह गए। वहीं नगर निगम ने शहरी क्षेत्र में पिछले एक साल में 5,108 बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़े जाने का दावा किया। इस आंकड़ेबाजी में विरोधाभास ने नागरिकों में सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर बंदरों की असली संख्या कितनी है।

नगर निगम का बयान

नगर निगम अधिकारी बताते हैं कि बंदरों को पकड़ने के अभियान के लिए निविदा जल्द खुल जाएगी। वहीं, कुत्ते पकड़ने का अभियान लगातार जारी है।

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