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आम बजट 2026: मध्यम वर्ग को मिल सकती है राहत, पति-पत्नी के लिए संयुक्त टैक्स रिटर्न पर विचार

आम बजट 2026: मध्यम वर्ग को राहत, पति-पत्नी के लिए संयुक्त टैक्स रिटर्न पर विचार

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इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने सरकार को यह सुझाव दिया है कि शादीशुदा जोड़ों को अलग-अलग रिटर्न दाखिल करने के बजाय एक संयुक्त रिटर्न की सुविधा दी जाए। इस व्यवस्था में पति-पत्नी की आय को जोड़कर टैक्स की गणना होगी और छूट भी संयुक्त रूप से लागू होगी।

हालांकि, अगर दोनों पति-पत्नी कामकाजी हैं और उन्हें अलग-अलग रिटर्न दाखिल करने से ज्यादा लाभ मिलता है, तो उन्हें अलग रिटर्न दाखिल करने का विकल्प भी रहेगा। यानी यह व्यवस्था लचीली होगी और करदाताओं को अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प चुनने का अधिकार मिलेगा।

📌 मध्यम वर्ग की उम्मीदें

मध्यम वर्ग हमेशा से बजट में टैक्स राहत की उम्मीद करता है। बढ़ती महंगाई और खर्चों के बीच टैक्स स्लैब में बदलाव या छूट बढ़ने से उन्हें सीधी राहत मिलती है। संयुक्त रिटर्न की सुविधा मिलने पर कई परिवारों को टैक्स बचत का अवसर मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, अगर पति-पत्नी दोनों की आय अलग-अलग स्लैब में आती है, तो संयुक्त रिटर्न से वे कम टैक्स दर का लाभ उठा सकते हैं।

इसके अलावा, शिक्षा, स्वास्थ्य और गृह ऋण जैसी छूटों को भी संयुक्त रूप से लागू करने पर परिवारों को अधिक फायदा होगा। यह व्यवस्था न केवल टैक्स बचत में मदद करेगी, बल्कि आयकर प्रणाली को सरल बनाने की दिशा में भी एक कदम होगी।

📌 अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

संयुक्त टैक्स रिटर्न की व्यवस्था कई देशों में पहले से लागू है। अमेरिका और यूरोप के कई देशों में पति-पत्नी को संयुक्त रूप से टैक्स रिटर्न दाखिल करने की सुविधा दी जाती है। वहां यह व्यवस्था परिवारों को टैक्स बचत का अवसर देती है और कर प्रणाली को अधिक न्यायसंगत बनाती है। भारत में अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक बड़ा सुधार होगा।

📌 संभावित चुनौतियां

हालांकि इस व्यवस्था को लागू करने में कुछ चुनौतियां भी होंगी। टैक्स विभाग को नई प्रणाली के लिए तकनीकी बदलाव करने होंगे। साथ ही, यह सुनिश्चित करना होगा कि करदाताओं को सही जानकारी और मार्गदर्शन मिले। संयुक्त रिटर्न से जुड़े नियमों को स्पष्ट करना जरूरी होगा ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने।

📌 निष्कर्ष

आम बजट 2026 से मध्यम वर्ग और टैक्स पेयर्स को बड़ी उम्मीदें हैं। अगर संयुक्त टैक्स रिटर्न की सुविधा लागू होती है तो यह भारतीय कर प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा। इससे न केवल परिवारों को राहत मिलेगी, बल्कि टैक्स व्यवस्था को सरल और न्यायसंगत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम होगा। अब सबकी निगाहें 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट पर हैं, जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण यह स्पष्ट करेंगी कि सरकार इस सुझाव को अपनाती है या नहीं।

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