जस्टिस उज्ज्वल भुयान बोले– न्यायपालिका की आजादी के लिए सबसे बड़ा खतरा सिस्टम के भीतर
जस्टिस उज्ज्वल भुयान: न्यायपालिका की आजादी के लिए सबसे बड़ा खतरा सिस्टम के भीतर
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुयान ने शनिवार, 24 जनवरी को न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की आजादी के लिए सबसे बड़ा खतरा बाहरी नहीं, बल्कि सिस्टम के अंदर ही मौजूद है।
जस्टिस भुयान ने अपनी असहमति और निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सुझाव पर जस्टिस अतुल श्रीधरन को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर करने का कॉलेजियम का फैसला न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करता है।
📌 पुणे में दिया बयान
जस्टिस भुयान ने यह बात पुणे के ILS लॉ कॉलेज में आयोजित संवैधानिक नैतिकता और लोकतांत्रिक शासन विषयक प्रिंसिपल जी. वी. पंडित मेमोरियल कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा, “यह कॉलेजियम सिस्टम में कार्यकारी प्रभाव का एक बड़ा दखल दिखाता है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।”
📌 महत्व
- जस्टिस भुयान का यह बयान न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संतुलन पर बहस को और तेज कर सकता है।
- कॉलेजियम प्रणाली को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठाए गए हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज की ओर से इस तरह की खुली टिप्पणी विशेष महत्व रखती है।
- यह बयान न्यायपालिका की स्वतंत्रता और पारदर्शिता पर नए विमर्श की शुरुआत कर सकता है।
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