रोहतास :कूड़े के ढेर पर मिली नवजात की पीड़ा: मां, मेरी क्या गलती थी?
रोहतास :कूड़े के ढेर पर छोड़ी गई नवजात, मां और समाज से जुड़े सवाल

रोहतास :
मां, आखिर मेरी क्या गलती थी?
तुम बता तो सकती थीं कि मेरा अपराध क्या था। नौ महीने तक अपनी कोख में मुझे पालने, असहनीय पीड़ा सहने के बाद आखिर वह कौन-सी मजबूरी थी, जिसने तुम्हें मुझे कूड़े के ढेर पर छोड़ देने को मजबूर कर दिया।
मैं तो अभी अपनी आंखें भी पूरी तरह खोल नहीं पाई थी, दुनिया को देख भी नहीं पाई थी, उससे पहले ही तुमने मुझे अपनी ममता से दूर कर दिया। शायद तुम्हारी भी कोई विवशता रही होगी, कोई ऐसा बोझ जो तुम शब्दों में नहीं कह सकीं।
मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है, कोई शिकवा भी नहीं। बस एक बेचैनी है, एक गहरा दुःख—इस बात का कि लोग तुम्हारे बारे में क्या कहेंगे। डर बस इतना है कि कहीं “मां” जैसा पवित्र शब्द कलंकित न हो जाए।
यह पीड़ा असहनीय है, और होगी भी क्यों नहीं। एक ओर समाज बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा लगाता है, और दूसरी ओर मेरी मां… ममता को शर्मसार करने पर मजबूर हो जाती है।






