हरिनगर बना उरमुरा किरार: ग्रामीणों की मांग पर मुख्यमंत्री ने दी स्वीकृति
तहसील क्षेत्र के गांव उरमुरा किरार का नाम अब आधिकारिक रूप से बदलकर हरिनगर कर दिया गया है। शनिवार को मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। यह निर्णय ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग का परिणाम है। गांव के लोगों ने इस ऐतिहासिक पल का स्वागत मिठाई बांटकर और खुशी जाहिर कर किया।
ग्राम पंचायत वासुदेवमई के अंतर्गत आने वाले इस गांव की आबादी लगभग दो हजार है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के नाम के साथ जुड़ा “किरार” शब्द जाति सूचक था, जिसके कारण वे असहज महसूस करते थे। इसी वजह से गांव का नाम बदलने की मांग वर्षों से उठती रही। ग्राम प्रधान नीरज धनराज ने बताया कि ग्रामीणों को लगता था कि यह नाम उनकी सामाजिक पहचान को सीमित करता है।
तहसील प्रशासन ने ग्रामीणों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए पांच महीने पहले नाम परिवर्तन का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इस प्रस्ताव पर विचार करने के बाद अंततः शनिवार को मुख्यमंत्री ने इसे स्वीकृति प्रदान की। इस निर्णय के बाद गांव का नया नाम हरिनगर आधिकारिक रूप से दर्ज हो गया है।
ग्राम प्रधान नीरज धनराज ने जानकारी दी कि गांव के नाम बदलने की पहल 2022 से लगातार चल रही थी। इस प्रयास में ऋषि कुमार जादौन और अन्य ग्रामीणों ने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से संपर्क कर अपनी भावनाएं व्यक्त की थीं। अंततः उनकी आवाज शासन तक पहुंची और अब गांव को नया नाम मिल गया है।
गांव में इस निर्णय की खबर मिलते ही उत्सव का माहौल बन गया। ग्राम प्रधान ने स्वयं मिठाई वितरित कर ग्रामीणों को बधाई दी। लोगों ने इसे अपनी सामाजिक गरिमा और आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ कदम बताया। ग्रामीणों का कहना है कि नया नाम हरिनगर उनके लिए सकारात्मक पहचान का प्रतीक बनेगा।
नाम परिवर्तन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों की भावनाओं और उनकी सामाजिक आकांक्षाओं का सम्मान भी है। लंबे समय से गांव के लोग चाहते थे कि उनके गांव का नाम ऐसा हो जो किसी जाति या वर्ग विशेष का संकेत न दे। अब उन्हें लगता है कि नया नाम उनके गांव को नई पहचान और गौरव प्रदान करेगा।
इस निर्णय से ग्रामीणों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है। गांव के बुजुर्गों ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया और कहा कि आने वाली पीढ़ियां इस बदलाव को गर्व से याद करेंगी। वहीं युवाओं ने इसे सामाजिक समानता और सम्मान की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना।
गांव का नाम बदलकर हरिनगर किए जाने से प्रशासनिक अभिलेखों में भी संशोधन किया जाएगा। अब सभी सरकारी दस्तावेजों, योजनाओं और अभिलेखों में गांव का नया नाम दर्ज होगा। ग्रामीणों का मानना है कि इससे उनके गांव की पहचान और भी सशक्त होगी।
इस प्रकार, उरमुरा किरार से हरिनगर तक की यात्रा केवल नाम परिवर्तन की कहानी नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों की सामूहिक इच्छाशक्ति, सामाजिक सम्मान और आत्मगौरव की मिसाल भी है।





