भूलकर भी न करें यह गलती! पक्का मकान छिपाकर PM आवास मांगने वालों के आवेदन हो रहे निरस्त बरेली |

प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के तहत आवास पाने के लिए किए गए फर्जी दावों पर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। सेल्फ सर्वे के दौरान पक्के मकान को कच्चा दर्शाने वाले आवेदकों का खेल सत्यापन में सामने आते ही उनके आवेदन धड़ाधड़ निरस्त किए जा रहे हैं।
जिला प्रशासन के अनुसार अब तक संदिग्ध और सेल्फ सर्वे के जरिए किए गए 92 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का भौतिक सत्यापन पूरा किया जा चुका है। शेष आवेदनों का सत्यापन भी जल्द पूरा कर अंतिम लाभार्थी सूची तैयार कर ली जाएगी।
हालांकि योजना के तहत स्वीकृत लाभार्थियों को मिलने वाली धनराशि की अगली किस्त की तिथि अभी तय नहीं की गई है। कुछ दिन पहले ही पीएम आवास योजना–ग्रामीण के अंतर्गत पहली किस्त जारी की गई थी।
65 हजार से अधिक आवेदन, बड़ी संख्या में गड़बड़ी
प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के तहत जनवरी 2025 तक कुल 65,804 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से विभागीय सत्यापन के बाद 30,140 आवेदनों को स्वीकृति दी गई, जबकि बड़ी संख्या में आवेदन संदेह के दायरे में पाए गए।
इसके अलावा 35,564 आवेदक सेल्फ सर्वे के माध्यम से सामने आए, जिनका जनवरी माह में सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन कार्य के लिए जिले में 141 अधिकारी तैनात किए गए हैं, जबकि 18 विभागों के कर्मचारी इस प्रक्रिया में लगाए गए हैं।
ब्लॉक स्तर पर भी 100 वेरिफायर तैनात किए गए हैं। 29 जनवरी तक जहां करीब 23 हजार आवेदनों (68%) का सत्यापन हुआ था, वहीं सीडीओ देवयानी के निर्देश पर प्रक्रिया तेज की गई और 31 जनवरी तक 32 हजार से अधिक आवेदन सत्यापित कर लिए गए। फिलहाल 92 प्रतिशत से अधिक सत्यापन पूरा हो चुका है।
पात्रता के सख्त मानक
परियोजना निदेशक चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि योजना के तहत पात्रता के स्पष्ट मानक तय हैं। इसके अनुसार केवल वही ग्रामीण परिवार पात्र माने जाएंगे—
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जिनके पास स्वयं का पक्का मकान नहीं है
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या जो शून्य, एक या दो कमरों के कच्ची दीवार व कच्ची छत वाले मकानों में रहते हैं
इसके अलावा निम्न स्थितियों में आवेदक अपात्र माना जाएगा—
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मोटरयुक्त तिपहिया या चौपहिया वाहन का स्वामित्व
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मशीनयुक्त कृषि उपकरण
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50 हजार रुपये या उससे अधिक सीमा वाला किसान क्रेडिट कार्ड
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परिवार का कोई सदस्य सरकारी कर्मचारी
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परिवार का कोई सदस्य 15 हजार रुपये से अधिक मासिक आय वाला
सेल्फ सर्वे में ज्यादा फर्जीवाड़ा
पीडी ने बताया कि सत्यापन के दौरान सबसे अधिक खामियां सेल्फ सर्वे मामलों में सामने आई हैं। कई आवेदकों ने पक्का मकान होने के बावजूद खुद को कच्चे मकान में रहने वाला दिखाया, जबकि कुछ मामलों में चार कमरों के पक्के मकान होने के बावजूद गलत जानकारी दी गई।
मानकों पर खरे न उतरने वाले सभी आवेदनों को सत्यापन के बाद निरस्त किया जा रहा है।





