अयोध्या के गुप्तारघाट में लौट रहा त्रेता युग का वैभव, तीसरे चरण का विकास अंतिम दौर में
अयोध्या का ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल गुप्तारघाट एक बार फिर अपने प्राचीन वैभव की ओर बढ़ रहा है। योगी सरकार की रामराज्य की परिकल्पना के अनुरूप यहां पर्यटन विकास कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल इस प्रमुख पर्यटन स्थल पर चल रहा तीसरे चरण का विकास कार्य अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जिसके पूरा होते ही गुप्तारघाट का स्वरूप पूरी तरह बदला हुआ दिखाई देगा।
आने वाले दिनों में गुप्तारघाट का हर दृश्य त्रेता युग और रामायण काल की स्मृतियों से जुड़ता नज़र आएगा। इसी क्रम में यहां निर्मित किया जा रहा भव्य ओपन एयर थिएटर विशेष आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है, जिसे संभवतः होली तक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इस ओपन थिएटर के माध्यम से रामायण से जुड़े प्रसंगों का जीवंत मंचन किया जा सकेगा।
गुप्तारघाट परिसर में रावण वध, हनुमान और जटायु की विशाल एवं कलात्मक मूर्तियां भी तैयार हो चुकी हैं। ये प्रतिमाएं न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती देंगी, बल्कि रामायण की कथा को दृश्य रूप में प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आध्यात्मिक अनुभव भी प्रदान करेंगी।
गुप्तारघाट का महत्व केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने यहीं से जल समाधि ली थी और सरयू नदी में अंतिम बार प्रवेश किया था। यही कारण है कि यह स्थल राम भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है।
योगी सरकार ने गुप्तारघाट को विश्व स्तरीय धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। पहले और दूसरे चरण में यहां बड़े पैमाने पर विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इनमें घाटों का सौंदर्यीकरण, आधुनिक पार्कों का निर्माण, वॉटर स्पोर्ट्स सुविधाएं, योग और ध्यान केंद्र, बैठने की बेहतर व्यवस्थाएं और पर्यटकों की सुविधाओं से जुड़े कई ढांचागत कार्य शामिल हैं।
अब तीसरे चरण में घाट के अंतिम छोर का विकास कार्य कराया जा रहा है, जिस पर कुल 1833.63 लाख रुपये (लगभग 18.34 करोड़ रुपये) की लागत आ रही है। इस चरण के पूरा होते ही गुप्तारघाट न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण के रूप में उभरेगा।





